The Constitution of India The Union LLB Law Study Material in Hindi

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भाग 5 (Part V)

संघ (The Union) 

अध्याय 1 (Chapter 1)

कार्यपालिका (The Executive)

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति (The President and Vice President)

`भारत का एक राष्ट्रपति होगा।

  1. संघ की कार्यपालिका शक्ति.-(1) संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी और वह इसका प्रयोग इस संविधान के अनुसार स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के द्वारा करेगा।
  2. संविधान (बयालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 11 द्वारा (3-1-1977 से) अंत:स्थापित ।
  3. संविधान (छियासीवां संशोधन) अधिनियम, 2002 की धारा 4 द्वारा (1-4-2010 से) अंत:स्थापित।

(2) पूर्वगामी उपबंध की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, संघ के रक्षा बलों का सर्वोच्च समादेश राष्ट्रपति में निहित होगा और उसका प्रयोग विधि द्वारा विनियमित होगा |

(3) इस अनुच्छेद की कोई बात—

(क) किसी विद्यमान विधि द्वारा किसी राज्य की सरकार या अन्य प्राधिकारी को प्रदान कि ? कृत्य राष्ट्रपति को अंतरित करने वाली नहीं समझी जाएगी; या

(ख) राष्ट्रपति से भिन्न अन्य प्राधिकारियों को विधि द्वारा कृय प्रदान करने में संसद को निवारित नहीं करेगी।

  1. राष्ट्रपति का निर्वाचन.-राष्ट्रपति का निर्वाचन ऐसे निर्वाचक गण के सदस्य करेंगे जिसमें-

(क) संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य, और

(ख) राज्यों की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य, होंगे।

1[स्पष्टीकरण-इस अनुच्छेद और अनुच्छेद 55 में प्रयुक्त ‘राज्य’ शब्द में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और पांडिचेरी भी आता है।

  1. राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीति-(1) जहां तक साध्य हो, राष्ट्रपति के निर्वाचन में भिन्न-भिन्न राज्यों के प्रतिनिधित्व के मापमान में एकरूपता होगी।

(2) राज्यों में आपस में ऐसी एकरूपता तथा समस्त राज्यों और संघ में समतुल्यता प्राप्त कराने के लिए संसद और प्रत्येक राज्य की विधान सभा का प्रत्येक निर्वाचित सदस्य ऐसे निर्वाचन में जितने मत देने का हकदार है उनकी संख्या निम्नलिखित रीति से अवधारित की जाएगी, अर्थात् :–

(क) किसी राज्य की विधान सभा के प्रत्येक निर्वाचित सदस्य के उतने मत होंगे जितने कि एक हजार के गुणित उस भागफल में हों जो राज्य की जनसंख्या को उस विधान सभा के निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या से भाग देने पर आए;

(ख) यदि एक हजार के उक्त गुणितों को लेने के बाद शेष पांच सौ से कम नहीं है तो उपखंड (क) में निर्दिष्ट प्रत्येक सदस्य के मतों की संख्या में एक और जोड़ दिया जाएगा;

(ग) संसद के प्रत्येक सदन के प्रत्येक निर्वाचित सदस्य के मतों की संख्या वह होगी जो उपखंड (क) और उपखंड (ख) के अधीन राज्यों की विधान सभाओं के सदस्यों के लिए नियत कुल मतों की संख्या को, संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या से भाग देने पर आए, जिसमें आधे से अधिक भिन्न को एक गिना जाएगा और अन्य भिन्नों की उपेक्षा की जाएगी।

(3) राष्ट्रपति का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होगा और ऐसे निर्वाचन में मतदान गुप्त होगा।

[स्पष्टीकरण.- इस अनुच्छेद में, “जनसंख्या” पद से ऐसी अंतिम पूर्ववर्ती जनगणना में अभिनिश्चित की गई जनसंख्या अभिप्रेत है जिसके सुसंगत आंकड़े प्रकाशित हो गए हैं:

परन्तु इस स्पष्टीकरण में अंतिम पूर्ववर्ती जनगणना के प्रति, जिसके सुसंगत आंकड़े प्रकाशित हो गए हैं, निर्देश का, जब तक सन् 4[2026] के पश्चात् की गई पहली जनगणना के सुसंगत अकडे प्रकाशित नहीं है। जाते हैं, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह 1971 की जनगणना के प्रति निर्देश है।।

  1. राष्ट्रपति की पदावधि.– (1) राष्ट्रपति अपने पद ग्रहण की तारीख से पांच वर्ष की अवधि तक पद धारण करेगा |

१. संविधान (सत्तरवां संशोधन) अधिनियम, 1992 की धारा 2 द्वारा (1-6-1995 से) प्रतिस्थापित ।

  1. पांडिचेरी (नाम परिवर्तन) अधिनियम, 2006 (2006 का 44) की धारा 4 द्वारा (1-10-2006 से) पुडुचेरी ।

३. संविधान ( बयालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 12 द्वारा (3-1-1977 से) स्पष्ट प्रतिस्थापित ।

  1. संविधान (चौरासीवां संशोधन) अधिनियम, 2001 की धारा 2 द्वारा 2000” के स्थान पर (21-2-2002 से) प्रतिस्थापित |

परन्तु—

(क) राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग

सकेगा; ।

(ख) संविधान का अतिक्रमण करने पर राष्ट्रपति को अनुच्छेद 61 में उपबंधित रीति से चलाए

गए महाभियोग द्वारा पद से हटाया जा सकेगा;

(ग) राष्ट्रपति, अपने पद की अवधि समाप्त हो जाने पर भी, तब तक पद धारण करता रहेगा।

जब तक उसका उत्तराधिकारी अपना पद ग्रहण नहीं कर लेता है।

(2) खंड (1) के परंतुक के खंड (क) के अधीन उपराष्ट्रपति को संबोधित त्यागपत्र की सूचना उसके द्वारा लोक सभा के अध्यक्ष को तुरंत दी जाएगी।

  1. पुनर्निर्वाचन के लिए पात्रता.-कोई व्यक्ति, जो राष्ट्रपति के रूप में पद धारण करता है या कर चुका है, इस संविधान के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए उस पद के लिए पुनर्निर्वाचन का पात्र होगा। |
  2. राष्ट्रपति निर्वाचित होने के लिए अर्हताएं.-(1) कोई व्यक्ति राष्ट्रपति निर्वाचित होने का पात्र तभी होगा, जब वह–

(क) भारत का नागरिक है,

(ख) पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका है, और

(ग) लोक सभा का सदस्य निर्वाचित होने के लिए अर्हित है।

(2) कोई व्यक्ति, जो भारत सरकार के या किसी राज्य की सरकार के अधीन अथवा उक्त सरकारों में से किसी के नियंत्रण में किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकारी के अधीन कोई लाभ का पद धारण करता है, राष्ट्रपति निर्वाचित होने का पात्र नहीं होगा।

स्पष्टीकरण.-इस अनुच्छेद के प्रयोजनों के लिए, कोई व्यक्ति केवल इस कारण कोई लाभ का पद धारण करने वाला नहीं समझा जाएगा कि वह संघ का राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति या किसी राज्य का राज्यपाल [* * *] है अथवा संघ का या किसी राज्य का मंत्री है। |


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