The Constitution of India Parliament LLB Law Study Material in Hindi

The Constitution of India Parliament LLB Law Study Material in Hindi

The Constitution of India Parliament LLB Law Study Material in Hindi : There Shall be a Parliament for the Union which shall consist of the President and two Houses to be known respectively as the Council of States and the House of the People. The Constitution of India LLB Low Study Material in Hindi (English)

The Constitution of India Parliament LLB Law Study Material in Hindi

The Constitution of India Parliament LLB Law Study Material in Hindi

अध्याय 2 (Chapter II)

संसद् (Parliament)

साधारण (General)

  1. संसद का गठन.- संघ के लिए एक संसद् होगी जो राष्ट्रपति और दो सदनों से मिल कर बनेगी। जिनके नाम राज्य सभा और लोक सभा होंगे।
  2. राज्य सभा की संरचना.- (1) [[* * *] राज्य सभा]

(क) राष्ट्रपति द्वारा खंड (3) के उपबंधों के अनुसार नामनिर्देशित किए जाने वाले बारह सदस्यों, और

(ख) राज्यों के [और संघ राज्यक्षेत्रों के] दो सौ अड़तीस से अनधिक प्रतिनिधियों, से मिलकर

बनेगी।

  1. देखिए, समय-समय पर यथासंशोधित अधिसूचना सं० का० आ० 2297, तारीख 3 नवम्बर, 1958, भारत का राजपत्र असाधारण, 1958, भाग 2, अनुभाग 3 (ii), पृष्ट 1315.
  2. संविधान ( बयालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976 की धारा 14 द्वारा (3-1-1977 से) खंड (4) अंत:स्थापित किया गया। था और संविधान (चवालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 12 द्वारा (20-6-1979 से) उसका लोप किया गया।
  3. संविधान (पैंतीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1974 की धारा 3 द्वारा (1-3-1975 से) * राज्य सभा के स्थान पर प्रतिस्थापित।।
  4. संविधान (छत्तीसवां संशोधन) अधिनियम, 1975 की धारा 5 द्वारा (26-4-1975 से) दसवीं अनुसूची के पैरा 4 के उपबंधों के अधीन रहते हु” शब्दों का लोप किया गया।
  5. संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 3 द्वारा (1-11-1956 से) जोड़ा गया।

2) राज्य सभा में राज्यों के 1[ और संघ राज्यक्षेत्रों के प्रतिनिधियों द्वारा भरे जाने वाले स्थानों का आबंटन चौथी अनुसूची में इस निमित्त अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसार होगा।

(3) राष्ट्रपति द्वारा खंड (1) के उपखंड (क) के अधीन नामनिर्देशित किए जाने वाले सदस्य ऐसे व्यक्ति होंगे, जिन्हें निम्नलिखित विषयों के संबंध में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव है, अर्थात् साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा।।

(4) राज्य सभा में प्रत्येक 2[* **] राज्य के प्रतिनिधियों का निर्वाचन उस राज्य की विधान सभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा किया जाएगा।

(5) राज्य सभा में 3[संघ राज्यक्षेत्रों के प्रतिनिधि ऐसी रीति से चुने जाएंगे जो संसद् विधि द्वारा विहित करे।

4[81. लोक सभा की संरचना.-(1) 5 [अनुच्छेद 331 के उपबंधों के अधीन रहते हुए 6[* * *]] लोक सभा

(क) राज्यों में प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने हुए 7[पांच सौ तीस] से अनधिक 8[सदस्यों], और।

(ख) संघ राज्यक्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने के लिए ऐसी रीति से, जो संसद विधि द्वारा उपबंधित करे, चुने हुए [बीस] से अनधिक 10[सदस्यों], से मिलकर बनेगी।

(2) खंड (1) के उपखंड (क) के प्रयोजनों के लिए, (क) प्रत्येक राज्य को लोक सभा में स्थानों का आबंटन ऐसी रीति से किया जाएगा कि स्थानों की संख्या से उस राज्य की जनसंख्या का अनुपात सभी राज्यों के लिए यथासाध्य एक ही हो, और।

(ख) प्रत्येक राज्य को प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों में ऐसी रीति से विभाजित किया जाएगा कि प्रत्येक निर्वाचन-क्षेत्र की जनसंख्या का उसको आबंटित स्थानों की संख्या से अनुपात समस्त राज्य में यथासाध्य एक ही होः

11[परन्तु इस खंड के उपखंड (क) के उपबंध किसी राज्य को लोकसभा में स्थानों के आबंटन के प्रयोजन के लिए तब तक लागू नहीं होंगे जब तक उस राज्य की जनसंख्या साठ लाख से अधिक नहीं हो जाती है।]

(3) इस अनुच्छेद में, “जनसंख्या” पद से ऐसी अंतिम पूर्ववर्ती जनगणना में अभिनिश्चित की गई जनसंख्या अभिप्रेत है जिसके सुसंगत आंकड़े प्रकाशित हो गए हैं।

  1. संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 3 द्वारा (1-11-1956 से) जोडा गया।
  2. संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 3 द्वारा पहली अनुसूची के भाग क या भाग ख में विनिर्दिष्ट शब्दों और अक्षरों का लोप किया गया।
  3. संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 3 द्वारा पहली अनुसूची के भाग ग में विनिर्दिष्ट राज्यों” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।।
  4. संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 की धारा 4 द्वारा (1-11-1956 से) अनुच्छेद 87 और 82 के स्थान पर प्रतिस्थापित ।।
  5. संविधान (पैंतीसवां संशोधन) अधिनियम, 1974 की धारा 4 द्वारा (1-3-1975 से) अनुच्छेद 331 के उपबंधों के अधीन रहते हुए” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  6. संविधान (छत्तीसवां संशोधन) अधिनियम, 1975 की धारा 5 द्वारा (26-4-1975 से) और दसवीं अनुसूची के पैरा 4 में” शब्दों और अक्षरों का लोप किया गया।
  7. गोवा, दमन और दीव पुनर्गठन अधिनियम, 1987 (1987 का 18) की धारा 63 द्वारा (30-5-1987 से) “पांच सौ पच्चीस” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  8. गोवा, दमन और दीव पुनर्गठन अधिनियम, 1987 (1987 का 18) द्वारा (30-5-1987 से) प्रतिस्थापित ।।
  9. संविधान (इकतीसवां संशोधन) अधिनियम, 1973 की धारा 2 द्वारा “पच्चीस सदस्यों के स्थान पर प्रतिस्थापित ।।
  10. संविधान (इकतीसवां संश्न ) अधिनियम, 1973 की धारा 2 द्वारा प्रतिस्थापित।
  11. संविधान (इकतीसवां संशोधन) अधिनियम, 1973 की धारा 2 द्वारा अंत:स्थापित।

परन्तु इस खंड में अंतिम पूर्ववर्ती जनगणना के प्रति, जिसके गगत आंक, प्रकाश हो गई है, निर्देश का, जब तक सन् [2026] के पश्चात् की गई पहली जनगणना के अरोगत आहे प्रकाशित नहीं हो जाते हैं, यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह

(i) खण्ड 2 के उपखण्ड (क) और उसे सराट के चरक के प्रयोजन के लिए 1971 की

जनगणना के लिए प्रति निर्देश हैं, और

(ii) खण्ड (2) के उपखण्ड (ख) के प्रयोजनों के लिए | 2011 की जनगणना के प्रति निर्देश हैं ।]]

  1. प्रत्येक जनगणना के पश्चात पुनः समायोजन, प्रत्येक जनगणना की समाप्ति पर राज्यों को लोक सभा में स्थानों के आबंटन और प्रत्येक राज्य के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों में विधाजन का हैं। प्राधिकारी द्वारा और ऐसी रीति से पुन: समायोजन किया जाएगा जो संसद विधि द्वारा अवैधारित करे:

परन्तु ऐसे पुन: समायोजन से लोक सभा में प्रतिनिधित्व पर तब तक कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा जब तक उस समय विद्यमान लोक सभा का विघटन नहीं हो जाता है: | 4 [परन्तु यह और कि ऐसा पुनः समायोजन उस तारी से प्रभावी होगा जो राष्ट्रपति आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे और ऐसे पुन: समायोजन के प्रभावी होने तक लोक सभा के लिए कोई निर्वाचन उन प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों के आधार पर हो सकेगा जो ऐसे पुन: समायोजन के पहले विद्यमान है:


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