The Constitution of India Fundamental Rights LLB Law Study Material in Hindi

The Constitution of India Fundamental Rights LLB Law Study Material in Hindi

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The Constitution of India Fundamental Rights LLB Law Study Material in Hindi

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भाग 3

मूल अधिकार (Fundamental Rights)

साधारण (General)

  1. परिभाषा.- इस भाग में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, “राज्य” के अंतर्गत भारत की सरकार और संसद तथा राज्यचों में से प्रत्येक राज्य की सरकार और विधाम-मंडल तथा भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर या भारत सरकार के नियंत्रण के अधीन सभी स्थानीय और अन्य प्रधिकारी हैं।

टिप्पणी

यह अवधारित करने के लिये कि क्या कोई हस्ती इस अनुच्छेद के अधिन प्राधिकारी है, न्यायालयों के कारकों जैसे कम्पनी का गठन, उसके उदेश्यों, क्रत्योंय. उसके प्रबन्धन और नियंत्रण, उसके द्वारा प्राप्त वित्तीय सहायता, उसके क्रियात्मक नियन्त्रण और प्रशासनिक नियन्त्रण, सरकार द्वारा उसके प्रभुत्व के विस्तार पर और इस पर भऊ विचार करना चाहिये कि क्या उस पर सरकार का नियन्त्रण केवल विनियमकारी है और इस निष्कर्ष पर आना चाहिये कि विशिष्ट कम्पनी या निकाय के निर्देश में सभी पूर्वक्त तथ्यों का समुच्चयी प्रभाव इसे उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता के ध्यधीन प्राधिकारी बनायेगा। बामेर लारी एण्ड कं. लि. एवं अन्य वि. पार्थ सारथी सेन राय एवं अन्य, (2013) 8 एस. सी. सी. 345.

यदि व्यक्ति या प्राधिकारी इस अनुच्छेद के क्षेत्र के अन्तर्गत नहीं आता बल्कि लोक कर्तव्य का निर्वहन कर रहा है, तो रिट याचिका दाखिल की जा सकती है और परमादेश की रिट या समुचित रिट जारी की जा सकती हैं। लेकिन, ऐसे प्राइवेट निकाय को सारभूत रूप से या तो राज्यच कोष पर संचालित होना चाहिए या लोक कर्तव्य\लोक प्राक्रति की सकारात्मक आबध्दा का निर्वहन करना चाहिये या ऐसे कानूनी क्रत्य का निर्वहन करने के लिये उसे विवश करने के लिये किसी परिनियम के अधीन किसी क्रत्य का निवर्हन करने के लिये दायित्व के अधीन है। के. के. सक्सेना वि. इण्टरनेशनल कमीशन आन इरीगेशन एण्ड ड्रेनेज,(2015) 4 एस.  सी. सी. 670.        

  1. मूल अधिकारों से असंगत या उनका अल्पीकरण करने वाली विधियां.- (1) इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले भारत के राज्यक्षेत्र में प्रव्रत सभी विधियां उस मात्रा तक शून्य होगी जिस तक वे इस भाग के उपबंधों से असंगत हैं।

(2) राज्य ऐसी कोई विदि नहीमं बनाऐगा जो इस बाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों को छीनती हैं या न्यून करती है और इस खंड के उल्लघन में बनाईं गई प्रत्येक विधि उल्लघन की मात्रा तक शून्य होगी।

(3) इस अनुच्छेद में, जब तक कि संन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क)  “ विध” के अंतर्गत भारत के राज्यक्षेत्र में विधि का बल रखने वाला कोई अध्यादेश, आदेश, उपविधि, नियम, विनियम, अधिसूचना, रूढ़ी या प्रथा हैं:

(ख) “प्रव्रत विध” के अंतर्गत भारत के राज्यक्षेत्र में किसी विधान-मंडल या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा इस संविधान के प्रारंभ से पहले पारित या बनाई गई विधि है जो पहले ही निरसित नहीं कर दी गई है, चाहे ऐसी कोई विधि या उसका कोई भाग उस समय पूर्णतया या विशिष्ट क्षेत्रों में प्रवर्तन में नहीं है।

1[(4)   इस अनुच्छेद की कोई बात अनुच्छेद 368 के अधीन किए गए इस संविधान के किसी संशोधन को लागू नहीं होगी।)

टिप्पणी

यह अनुच्छेद स्पष्ट और असंदिग्ध शब्दों में अधिकथित करना है कि संविधाम पूर्व विधियों को शामिल करते हुए वे सभी विधियां शून्य हैं, जो भाग 3 द्वारा प्रत्याभूत मूल अधिकारों से असंगत या के अल्पीकरण में हैं। खण्ड (3) विधि के क्षेत्र के अन्तर्गत सभी नियमों, विनियमों, अधिसूचना, विधि का बल रखने वाले रूढ़ि और प्रथा को लाता है। आदि शेव सिचारीयार्गल नाला संगम एवं अन्य वि. तमीलनाडू सरकार एवं अन्य, ए. आई. आर. 2016 एस. सी.: (2016) 2 एस. सी. सी. 725.

इस अनुच्छेद का खण्ड (2) पबन्धित करता है कि कोई विधि अधिनियमित नहीं की जा सकती, जो संविधान के भाग 3 के अधीन प्रत्याभूत मूल अधिकारों के प्रतिकूल है ऐसे प्रावधान का उदेश्य यह सुनिश्चित करने के लिये हैकि विधि के किसी स्त्रोत से उद्भूत लिखत, स्थायी या अस्थायी, विधायी या न्यायिक या कोई अन्य स्त्रोत मूल अधिकारों के सम्बन्धित संवैधानिक प्रावधान का सम्मान करते हैं। इस प्रकार, इस अनुच्छेद का मूख्य उदेश्य विशेष रूप से मूल अधिकारों के सम्बन्ध में संविधान की सर्वच्चता को सुनिश्चित करना है। रेनू एवं अन्य वि. जिला एवं सत्र न्यायधीश, तीस हजारी एवं एक अन्य, ए. आई. आर. 2014 एस. सी. 2175 : (2014) 14 एस. सी. सी. 50.

   समता का अधिकार (Right to Equality)

  1. विधि के समक्ष समता.- राज्य, भारत के राज्यक्षेत्र में किसी व्यक्ति को विदि के समक्ष समता से या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगीं।

   टिप्पणी

यह अनुच्छेद समादेश देता है कि राज्य कार्यवाही मनमानापूर्ण और विभेदपूर्ण नहीं होना चाहिए। इसे किसी असंगत विचारों द्वारा भी मार्गनिर्धेशित नहीं होना चाहिये, जो समानता के प्रतकूल हैं। सीनीयर डिवीजनल कामर्शियल मेनेजर वि. एस. सी. आर. कैटरर्स. ड्राई फ्रूट्स, फ्रूट जूस स्टाल्स वेलफेयर एसोसिएशन, ए. आई. आर. 2016 एस. सी. 668.


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