The Constitution of India Directive Principles of State Policy LLB Law Study Material in Hindi

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The Constitution (One Hundred And First Amendment) Act 2016 LLB Law Study Material in Hindi

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भाग 4

राज्य की नीति के निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy)

  1. परिभाषा.-इस भाग में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, ‘‘राज्यका वही अर्थ है। जो भाग 3 में है।
  2. इस भाग में अंतर्विष्ट तत्वों को लागू होना.- इस भाग में अंतर्विष्ट उपबंध किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं होंगे किन्तु फिर भी इनमें अधिकथित तत्व देश के शासन में मूलभूत हैं और विधि बनाने में इन तत्वों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा।
  3. संविधान (पचासवां संशोधन) अधिनियम, 1984 की धारा 2 द्वारा अनुच्छेद 33 के स्थान पर प्रतिस्थापित।
  4. राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्यवस्था बनाएगा.-1[(1) राज्य ऐसी सामाजिक व्यवस्था की, जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय राष्ट्रीय जीवन की सभी संस्थाओं को अनुप्राणित करे, भरसक प्रभावी रूप में स्थापना और संरक्षण करके लोक कल्याण की । अभिवृद्धि का प्रयास करेगा।

2[(2) राज्य, विशिष्टतया, आय की असमानताओं को कम करने का प्रयास करेगा और न केवल व्यष्टियों के बीच बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले और विभिन्न व्यवसायों में लगे हुए लोगों के समूहों के बीच भी प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानता समाप्त करने का प्रयास करेगा।]

  1. राज्य द्वारा अनुसरणीय कुछ नीति तत्व.-राज्य अपनी नीति का, विशिष्टतया, इस प्रकार संचालन करेगा कि सुनिश्चित रूप से-

(क) पुरुष और स्त्री सभी नागरिकों को समान रूप से जीविका के पर्याप्त साधन प्राप्त करने का

अधिकार हो

(ख) समुदाय के भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण इस प्रकार बंटा हो जिससे

सामूहिक हित का सर्वोत्तम रूप से साधन हो;

(ग) आर्थिक व्यवस्था इस प्रकार चले जिससे धन और उत्पादन-साधनों का सर्वसाधारण के

लिए अहितकारी संकेद्रण न हो;

(घ) पुरुषों और स्त्रियों दोनों का समान कार्य के लिए समान वेतन हो;

(ङ) पुरुष और स्त्री कर्मकारों के स्वास्थ्य और शक्ति का तथा बालकों की सुकुमार अवस्था का दुरुपयोग न हो और आर्थिक आवश्यकता से विवश होकर नागरिकों को ऐसे रोजगारों में न जाना पड़े जो उनकी आयु या शक्ति के अनुकूल न हों;

[(च) बालकों को स्वतंत्र और गरिमामय वातावरण में स्वस्थ विकास के अवसर और सुविधाएं

दी जाएं और बालकों और अल्पवय व्यक्तियों की शोषण से तथा नैतिक और आर्थिक परित्याग से रक्षा की जाए।

टिप्पणी

संविधान के भाग 4 में, जो राज्य के नीति निदेशक तत्वों के सम्बन्ध में उपबन्धित करता है, अनुच्छेद 39 (क) प्रावधान करता है कि राज्य अपनी नीतियों को यह सुनिश्चित करने के लिए निदेश देगा कि नागरिकों, मनुष्यों और स्त्रियों को समान रूप से आजीविका के पर्याप्त साधनों का अधिकार है। अनुच्छेद 39 (घ) पुरषों और महिलाओं दोनों के लिए समान कार्य के लिए समान वेतन का प्रावधान करता है और अनुच्छेद 39 (ङ) नियत करता है कि कर्मकारों, पुरुषों और महिलाओं के स्वास्थ्य और शक्ति और बालकों के वयस आयु का दुरुपयोग नहीं किया जाता

और नागरिक अपनी आय या शक्ति के अनुपयुक्त पेशे में प्रवेश करने के लिए आर्थिक आवश्यकता द्वारा बाध्य नहीं किये जाते। उसे निर्दिष्ट करने का प्रयोजन यह समझने और मूल्यांकन करने के लिए कि कैसे राज्य की नीति के निदेशक तत्वों और अनुच्छेद 51क के अधीन परिकल्पित मूल कर्तव्यों को उच्चतम न्यायालय की निर्वचनात्मक प्रक्रिया द्वारा विस्तारित किया गया है। निदेशक तत्वों को संविधान की आत्मा माना गया है क्योंकि भारत कल्याणकारी राज्य है। चारू खुराना वि० भारत संघ, ए० आई० आर० 2015 एस० सी० 839:(2015) 1 एस० सी० सी० 192.

[39क. समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता.-राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि विधिक तंत्र इस प्रकार काम करे कि समान अवसर के आधार पर न्याय सुलभ हो और वह, विशिष्टतया, यह सुनिश्चित करने के लिए कि आर्थिक या किसी अन्य निर्योग्यता के कारण कोई नागरिक न्याय प्राप्त करने के अवसर से वंचित न रह जाए, उपयुक्त विधान या स्कीम द्वारा या किसी अन्य रीति से नि:शुल्क विधिक सहायता की व्यवस्था करेगा।


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