Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 23 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 23 LLB Notes Study Material

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Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 23 LLB Notes Study Material

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  1. ऐसे व्यक्ति का सदोष परिरोध, जिसके छोड़ने के लिए रिट निकल चुका है-जो कोई यह जानते हुए किसी व्यक्ति को सदोष परिरोध में रखेगा कि उस व्यक्ति को छोड़ने के लिए रिट सम्बन्।

1क. (2009) 3 क्रि० ला ज० 3733 (एस० सी०).

1ख. उपरोक्त सन्दर्भ.

रूप से निकल चुका है वह किसी अवधि के उस कारावास के अतिरिक्त, जिससे कि वह इस अध्याय किसी अन्य धारा के अधीन दण्डनीय हो, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष र की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा।

  1. गुप्त स्थान में सदोष परिरोध-जो कोई किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध इस प्रकार करेगा। जिससे यह आशय प्रतीत होता हो कि ऐसे परिरुद्ध व्यक्ति से हितबद्ध किसी व्यक्ति को या किसी लोक सेवक को ऐसे व्यक्ति के परिरोध की जानकारी न होने पाए या एतस्मिन्पूर्व वर्णित किसी ऐसे व्यक्ति या लोक सेवक को, ऐसे परिरोध के स्थान की जानकारी न होने पाए या उसका पता वह न चला पाए, वह उस दण्ड के अतिरिक्त जिसके लिए वह ऐसे सदोष परिरोध के लिए दण्डनीय हो, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा।
  2. सम्पत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य करने के लिए मजबूर करने के लिए सदोष परिरोध- जो कोई किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध इस प्रयोजन से करेगा कि उस परिरुद्ध व्यक्ति से, या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति से, कोई सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति उद्दापित की जाए, अथवा उस परिरुद्ध व्यक्ति को या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति को कोई ऐसी अवैध बात करने के लिए, या कोई ऐसी जानकारी देने के लिए जिससे अपराध का किया जाना सुकर हो जाए, मजबूर किया जाए, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी, दण्डनीय होगा।
  3. संस्वीकृति उद्दापित करने के लिए या विवश करके सम्पत्ति का प्रत्यावर्तन करने के लिए सदोष परिरोध-जो कोई किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध इस प्रयोजन से करेगा, कि उस परिरुद्ध व्यक्ति से, या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति से, कोई संस्वीकृति या कोई जानकारी, जिससे किसी अपराध या अवचार का पता चल सके, उद्दापित की जाए, या वह परिरुद्ध व्यक्ति या उससे हितबद्ध कोई व्यक्ति मजबूर किया जाए कि वह किसी सम्पत्ति या किसी मूल्यवान प्रतिभूति को प्रत्यावर्तित करे या करवाए या किसी दावे या मांग की तुष्टि करे या कोई ऐसी जानकारी दे जिससे किसी सम्पत्ति या किसी मूल्यवान प्रतिभूति का प्रत्यावर्तन कराया जा सके, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

आपराधिक बल और हमले के विषय में ।

(OF CRIMINAL FORCE AND ASSAULT)

  1. बल-कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति पर बल का प्रयोग करता है, यह कहा जाता है, यदि वह उस अन्य व्यक्ति में गति, गति-परिवर्तन या गतिहीनता कारित कर देता है या यदि वह किसी पदार्थ में ऐसी गति, गति-परिवर्तन या गतिहीनता कारित कर देता है जिससे उस पदार्थ का स्पर्श उस अन्य व्यक्ति के शरीर । के किसी भाग से या किसी ऐसी चीज से, जिसे वह अन्य व्यक्ति पहने हुए है या ले जा रहा है, या किसी ऐसी चीज से, जो इस प्रकार स्थित है कि ऐसे संस्पर्श से उस अन्य व्यक्ति की संवेदन-शक्ति पर प्रभाव पड़ता है, हो। जाता है :

परन्तु यह तब जबकि गतिमान, गति-परिवर्तन या गतिहीन करने वाला व्यक्ति उस गति, गति-परिवर्तन या गतिहीनता को एतस्मिन् पश्चात् वर्णित तीन तरीकों में से किसी एक द्वारा कारित करता है, अर्थात्

पहला-अपनी निजी शारीरिक शक्ति द्वारा।।

दूसरा-किसी पदार्थ के इस प्रकार व्ययन द्वारा कि उसके अपने या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कोई अन्य कार्य के किए जाने के बिना ही गति या गति-परिवर्तन या गतिहीनता घटित होती है,

तीसरा-किसी जीवजन्तु को गतिमान होने, गति-परिवर्तन करने का या गतिहीन होने के लिए उत्प्रेरण द्वारा। |

  1. आपराधिक बल जो कोई किसी व्यक्ति पर उस व्यक्ति की सम्मति के बिना बल का प्रयोग किसी अपराध को करने के लिए या उस व्यक्ति को, जिस पर बल का प्रयोग किया जाता है, क्षति, भय या क्षोभ, ऐसे बल के प्रयोग से कारित करने के आशय से, या ऐसे बल के प्रयोग से सम्भाव्यतः कारित करेगा, यह जानते हुए साशय करता है, वह उस अन्य व्यक्ति पर आपराधिक बल का प्रयोग करता है, यह कहा जाता है।

दृष्टान्त

(क) य नदी के किनारे रस्सी से बंधी हुई नाव पर बैठा है। क रस्सियों को उद्बन्धित करता है और इसी प्रकार नाव को धारा में साशय बहा देता है। यहाँ क, य को साशय गतिमान करता है, और वह ऐसा उन पदार्थों को ऐसी रीति से व्ययनित करके करता है कि किसी व्यक्ति की ओर से कोई अन्य कार्य किए बिना ही गति उत्पन्न हो जाती है। अतएव, क ने य पर बल का प्रयोग साशय किया है, और यदि उसने य की सम्मति के बिना यह कार्य कोई अपराध करने के लिए, यह आशय रखते हुए या यह सम्भाव्य जानते हुए किया है। कि ऐसे बल के प्रयोग से वह य को क्षति, भय या क्षोभ कारित करे, तो क ने य पर आपराधिक बल का प्रयोग किया है।

(ख) य एक रथ में सवार होकर चल रहा है, क, य के घोड़ों को चाबुक मारता है, और उसके द्वारा उनकी चाल को तेज कर देता है। यहाँ क ने जीव-जन्तुओं को उनकी अपनी गति परिवर्तित करने के लिए उत्प्रेरित करके य का गति परिवर्तन कर दिया है। अतएव, क ने य पर बल का प्रयोग किया है, और यदि क ने य की सम्मति के बिना यह कार्य यह आशय रखते हुए या यह सम्भाव्य जानते हुए किया है कि वह उससे य को क्षति, भय या क्षोभ उत्पन्न करे तो क ने य पर आपराधिक बल का प्रयोग किया है।

(ग) य एक पालकी में सवार होकर चल रहा है। य को लूटने का आशय रखते हुए क पालकी का डण्डा पकड़ लेता है,और पालकी को रोक देता है। यहाँ, क ने य को गतिहीन किया है, और यह उसने अपनी शारीरिक शक्ति द्वारा किया है। अतएव क ने य पर बल का प्रयोग किया है, और क ने य की सम्मति के बिना यह कार्य अपराध करने के लिए साशय किया है, इसलिए क ने य पर आपराधिक बल का प्रयोग किया है।

(घ) क सड़क पर साशय य को धक्का देता है। यहाँ क ने अपनी निजी शारीरिक शक्ति द्वारा अपने शरीर को इस प्रकार गति दी है कि वह य के संस्पर्श में आए। अतएव उसने साशय य पर बल का प्रयोग किया है, | और यदि उसने य की सम्मति के बिना यह कार्य यह आशय रखते हुए या यह सम्भाव्य जानते हुए किया है। कि वह उससे य को क्षति, भय या क्षोभ उत्पन्न करे, तो उसने य पर आपराधिक बल का प्रयोग किया है।

(ङ) क यह आशय रखते हुए या यह बात सम्भाव्य जानते हुए एक पत्थर फेंकता है कि वह पत्थर इस प्रकार य, या य के वस्त्र के या य द्वारा ले जाई जानेवाली किसी वस्तु के संस्पर्श में आएगा या कि वह पानी में गिरेगा और उछलकर पानी य के कपड़ों पर या य द्वारा ले जाई जाने वाली किसी वस्तु पर जा पड़ेगा। यहाँ, यदि पत्थर के फेंके जाने से यह परिणाम उत्पन्न हो जाए कि कोई पदार्थ य या य के वस्त्रों के संस्पर्श में आ जाए, तो क ने य पर बल का प्रयोग किया है, और यदि उसने य की सम्मति के बिना यह कार्य उसके द्वारा य का क्षति, भय या क्षोभ उत्पन्न करने का आशय रखते हुए किया है, तो उसने य पर आपराधिक बल का प्रयोग किया है।

(च) के किसी स्त्री का घूघट साशय हटा देता है। यहाँ, क ने उस पर साशय बल का प्रयोग किया है, और यदि उसने उस स्त्री को सम्मति के बिना यह कार्य यह आशय रखते हुए या यह सम्भाव्य जानते हुए कि उससे उसको क्षति, भय या क्षोभ उत्पन्न हो तो उसने उस पर आपराधिक बल का प्रयोग किया है |

(छ) य स्नान कर रहा है। क स्नान करने के टब में ऐसा जल डाल देता है जिसे वह जानता है कि उबल रहा है। यहाँ, उबलते हुए जल में ऐसी गति को अपनी शारीरिक शक्ति द्वारा साशय उत्पन्न करता है कि उस जल का संस्पर्श य से होता है या अन्य जल से होता है, जो इस प्रकार स्थित है कि ऐसे संस्पर्श से यह संवेदन शक्ति प्रभावित होती है, इसलिए क ने य पर साशय बल का प्रयोग किया है, और यदि उसने य की सम्मति के बिना यह कार्य यह आशय रखते हुए या यह सम्भाव्य जानते हुए किया है कि वह उससे य को क्षति, भय या क्षोभ उत्पन्न करे, तो क ने आपराधिक बल का प्रयोग किया है।

(ज) क, य की सम्मति के बिना, एक कुत्ते को य पर झपटने के लिए भड़काता है। यहाँ यदि क का आशय य को क्षति, भय या क्षोभ कारित करने का है, तो उसने य पर आपराधिक बल का प्रयोग किया है।

टिप्पणी

धारा 349 में परिभाषित ‘बल’ इस धारा के अन्तर्गत ‘‘आपराधिक बल’ बन जाता है यदि (1) यह कोई अपराध करने के लिये प्रयुक्त किया जाता है बिना उस व्यक्ति की सम्मति लिये जिसके विरुद्ध अपराध किया जाता है, या

(2) यदि किसी व्यक्ति पर क्षति, भय या क्षोभ कारित करने के आशय से प्रयुक्त किया जाता है।

इंगलिश विधि में प्रयुक्त “संप्रहार” (Battery) शब्द ‘‘आपराधिक बल” शब्द में निहित है। आपराधिक बल इतनी क्षुद्र प्रकृति का हो सकता है कि उससे वह धारा 95 के अन्तर्गत कोई अपराध नहीं संरचित कर सकेगा। ” आपरधिक बल” की परिभाषा इतनी विस्तृत है कि इसके अन्तर्गत ऐसे हर प्रकार के बल सम्मिलित किये जा सकते हैं जिनका कि अन्तिम लक्ष्य कोई व्यक्ति है।

अवयव-इस धारा के निम्नलिखित अवयव हैं

(1) किसी व्यक्ति के विरुद्ध साशय बल प्रयोग,

(2) ऐसे बल का प्रयोग उपहत व्यक्ति की सम्मति के बिना किया गया हों,

(3) बल प्रयोग कोई अपराध करने के लिये किया गया हो या जिस व्यक्ति के विरुद्ध बल प्रयोग होता है। उसे उपहति, भय या क्षोभ कारित करने के आशय से किया गया हो।

जहाँ अ, ब के ऊपर थूकता है, अ, ब के विरुद्ध आपराधिक बल का प्रयोग करने के लिये दण्डनीय होगा, क्योंकि थूकने से ब को क्षोभ अवश्य हुआ होगा। इसी प्रकार यदि अ किसी स्त्री का घूघट उठा देता है। तो वह इस धारा के अन्तर्गत दण्डनीय होगा। |


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