Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 22 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 22 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 22 LLB Notes Study Material : Law LLB Books Notes and Study Material Indian Penal Code All Semester in PDF Download 1st Semester, 2nd Semester and 3rd Semester Available on This Post, Law LLB Most Important IPC Notes for Student, BA LLB 1st Semester Notes in PDF File Online Download Free Website.

Indian Penal Code 1860 Offences Affecting Human Body LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 2 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 3 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 4 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 5 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 6 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 7 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 8 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 9 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 10 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 11 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 12 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 13 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 14 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 15 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 16 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 17 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 18 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 19 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 20 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 21 LLB Notes Study Material

LLB Book Notes Study Material All Semester Download PDF 1st 2nd 3rd Year Online

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 22 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 22 LLB Notes Study Material

सदोष अवरोध तथा सदोष परिरोध के विषय में

OF WRONGFUL RESTRAINT AND WRONGFUL CONFINEMENT

  1. सदोष अवरोध-जो कोई किसी व्यक्ति को स्वेच्छया ऐसे बाधा डालता है कि उस व्यक्ति को उस दिशा में, जिसमें उस व्यक्ति को जाने का अधिकार है, जाने से निवारित कर दे, वह उस व्यक्ति का सदोष अवरोध करता है, यह कहा जाता है। ।

अपवाद- भूमि के या जल के किसी प्राइवेट मार्ग में बाधा डालना जिसके सम्बन्ध में किसी व्यक्ति को सद्भावपूर्वक विश्वास है कि वहाँ बाधा डालने का उसे विधिपूर्ण अधिकार है, इस धारा के अर्थ के अन्तर्गत अपराध नहीं है।

दृष्टान्त

क एक मार्ग में, जिससे होकर जाने का य का अधिकार है, सद्भावपूर्वक यह विश्वास न रखते हुए कि उसको मार्ग रोकने का अधिकार प्राप्त है, बाधा डालता है। ये जाने से तद्द्वारा रोक दिया जाता है। क, ये का सदोष अवरोध करता है।

टिप्पणी

अवयव-इस धारा के निम्नलिखित प्रमुख अवयव हैं

(1) किसी व्यक्ति को स्वेच्छया बाधा डालना,

(2) बाधा ऐसी हो जो उस व्यक्ति को उस दिशा में, जिसमें उस व्यक्ति को जाने का अधिकार है, जाने से निवारित कर दे।

बाधा (Obstruction)—इस धारा के अन्तर्गत बाधा का अर्थ है शारीरिक बाधा। बाधा शारीरिक बल प्रयोग के अतिरिक्त धमकी या भय द्वारा भी उत्पन्न की जा सकती है। यदि बाधा सदोष है तो यह सदोष अवरोध होगा। सदोष अवरोध के लिये यह आवश्यक है कि एक व्यक्ति दूसरे को स्वेच्छया बाधा डाले। सदोष अवरोध का अर्थ है किसी व्यक्ति को उस स्थान से दूर रखना जहाँ वह रहना चाहता है और जहां उसे रहने का अधिकार है।51 सामीनन्दा पिल्लई52 के वाद में यह अभिनिर्धारण प्रदान किया गया था कि जनता के कहीं जाने के अधिकार में जहाँ और जब वह जाना चाहता है, २चमात्र भी विधि-विरुद्ध अवरोध उत्पन्न करना। न्यायोचित नहीं कहा जा सकता और धारा 341 के अन्तर्गत दण्डनीय है।

सामीनन्दा पिल्लई53 के वाद में परिवादकर्ता एक भ्रमणकर्ता था। उस पर सन्देह कर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और उसे एक सिपाही के कब्जे से दूसरे सिपाही के कब्जे में तब तक रखे रहा जब तक कि वह गन्तव्य पर नहीं पहुंच गया। जब उस व्यक्ति की शिनाख्त हो गयी तब उसे मुक्त कर दिया गया। यह अभिनिर्धारण प्रदान किया गया कि चूंकि उसे पुलिस संरक्षण में एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाया गया था अत: उसकी गतिविधियों पर जानबूझ कर बाधा उपस्थित की गयी थी। यह प्रक्रिया सदोष अवरोध है।

सदोष अवरोध किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता पर आंशिक अवरोध है। प्रत्येक व्यक्ति का शरीर पवित्र तथा मुक्त है। अतः विधि उन व्यक्तियों को दण्डित करती है जो इस स्वतन्त्रता पर अतिक्रमण करते हैं। यह अपराध तब गठित होता है जब किसी व्यक्ति के संचालन (movement) को किसी दूसरे व्यक्ति के कार्य द्वारा स्वेच्छया निलम्बित कर दिया जाता है। दूसरे शब्दों में किया गया कार्य अवरोध उत्पन्न करने के आशय, या ज्ञान या विश्वास से किया गया होना चाहिये।

अवरोध का अर्थ है किसी व्यक्ति की स्वतन्त्रता का उसकी इच्छा के विरुद्ध न्यूनन । अतः यदि कोई व्यक्ति निद्रा या अन्यथा द्वारा अपनी इच्छा शक्ति से वंचित कर दिया जाता है तो उस अवस्था में वह किसी अवरोध का पात्र नहीं बन सकता 54 बाधा का अर्थ है संचलन की इच्छा और यदि संचलन की इच्छा ही नहीं है तो संचलन पर बाधा उत्पन्न ही नहीं की जा सकती 25 किसी व्यक्ति के संचलन पर बाधा या तो बल प्रयोग द्वारा या प्रत्यक्ष या परोक्ष भय द्वारा उत्पन्न की जा सकती है 26 फलतः इस धारा के अन्तर्गत बल का प्रयोग किये जाने का भय न कि वास्तविक बल प्रयोग अपेक्षित है?

  1. नोट० एम० पी० 154.
  2. सामीनन्दा पिल्लई, (1882) 1 वेयर, 339.
  3. उपरोक्त सन्दर्भ.
  4. फतेह मुहम्मद बनाम इम्परर, ए० आई० आर० 1928 लाहौर 445.
  5. पगला बाबा बनाम राज्य, ए० आई० आर० 1957 उड़ीसा 130.
  6. रिले बनाम स्टोन, 94 एस० ई० 434. ।
  7. ओम प्रकाश तिलक चन्द्र बनाम राज्य, ए० आई० आर० 1959 पंजाब 134.

एक व्यक्ति एक दूसरे व्यक्ति के लिये एक ऐसे कार्य द्वारा जिससे दूसरे को यह प्रतीत हो कि उसका संचलन असम्भव, कठिन या घातक है अथवा उसका संचलन वस्तुत: असम्भव, कठिन या घातक बनाकर बाधा उत्पन्न कर सकता है। | निम्नलिखित कुछ ऐसे उदाहरण हैं जिनमें अभियुक्त ने संचलन को असम्भव, कठिन या घातक प्रती होने दिया

(क) क अपनी खतरनाक भैंस को उचित नियन्त्रण में रखने से लोप करता है और ज को स्वेच्छया उस सड़क पर से गुजरने से भयभीत करता है जिस सड़क पर से होकर उसे गुजरने का अधिकार है। |

(ख) अ, ज को धमकी देता है कि उस सड़क पर से जिस पर से गुजरने का ज को अधिकार है यदि वह गुजरेगा तो वह अपना जंगली कुत्ता उस पर छोड़ देगा।

(ग) अ, ज को धमकी देता है कि यदि ज उस सड़क से जिस पर होकर उसे गुजरने का अधिकार है। गुजरेगा तो वह अपना कुत्ता उस पर छोड़ देगा। कुत्ता भयानक प्रकृति का नहीं है किन्तु अ, ज को इस बात का आभास कराता है कि वह भयानक प्रकृति का है और इस प्रकार उसे सड़क पर से गुजरने से रोकता है। निम्नलिखित उदाहरणों में अभियुक्तों ने संचलन को वस्तुत: असम्भव, कठिन या घातक बना दिया(क) अ, उस रास्ते के आर-पार जिस पर से होकर ज को गुजरने का अधिकार है, एक दीवाल बना देता

(ख) अ एक घर में निवास कर रहा था। वह अपनी पत्नी तथा बच्चे के साथ बाजार जाता है। वापस लौटने पर वह पाता है कि उसके घर में बने बाहर से ताला बन्द कर दिया है। अत: अ उस पर घर में घुसने से वंचित हो जाता है जिसमें घुसने का उसे अधिकार है।8।

इस धारा के अन्तर्गत जो कुछ भी अपेक्षित है वह है एक व्यक्ति के स्वतन्त्र आवागमन में बाधा। इस बाधा में प्रयोग में लाये गये साधन महत्वपूर्ण नहीं है। शारीरिक बल का प्रयोग भी आवश्यक नहीं है। सामान्यतया मौखिक निषेध या आपत्ति बाधा के तल्य नहीं मानी जाती 59 कतिपय परिस्थितियों में इसे धमकी या केवल शब्दों द्वारा60 कारित किया जा सकता है किन्तु इस अवस्था में इसका प्रभाव ऐसा होना चाहिये कि अपेक्षित बाधा का परिणाम उत्पन्न हो सके। बाधित व्यक्ति के मस्तिष्क पर ऐसे शब्दों का प्रभाव अधिक महत्वपूर्ण है न कि प्रभाव उत्पन्न करने का ढंग 61 केवल निर्देश या प्रदर्शन द्वारा सदोष अवरोध नहीं उत्पन्न होता।62

म्युनिसिपल प्राधिकारियों द्वारा घोषित लोक पथों पर सभी व्यक्तियों को समान अधिकार है। इसलिये समाज का एक वर्ग दूसरे वर्ग को ऐसे लोक पथों पर उनके अधिकारों के विधिपूर्ण प्रयोग से वंचित नहीं कर सकता है।63 लोगों को यह अधिकार है कि वे किसी शव को लोक पथ पर से ले जा सकें 64 ।

व्यक्ति (Person)-इस धारा को लागू होने के लिये यह आवश्यक है कि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतन्त्रता अवरोधित हुई हो। प्रश्न यह है कि क्या कोई नाजुक उम्र का शिशु जो अपने पैरों के सहारे नहीं चल सकता, अवरोध का विषय वस्तु बन सकता है? यह प्रश्न महेन्द्र नाथ चक्रवर्ती बनाम इम्परर65 के वाद में उठाया गया था। न्यायालय का कथन था कि इस धारा का विस्तार केवल उन मामलों तक ही सीमित नहीं है। जिनमें सम्बन्धित व्यक्ति अपने पैरों के सहारे चल सकता हो या अपनी शक्ति के अन्तर्गत भौतिक साधनों के सहारे चल सकता हो। मात्र भौतिक साधनों के सहारे चलने वाले व्यक्तियों को भी इस धारा के अन्तर्गत अवरोधित किया जा सकता है।

एक दूसरा मुद्दा जो यहाँ विचारणीय है, वह यह है कि यदि किसी वाहन में कोई व्यक्ति बैठा हुआ है तो क्या ऐसे वाहन का सदोष अवरोध हो सकता है या नहीं। इस प्रश्न पर मतैक्य नहीं है। इम्परर बनाम रामलाला66 के वाद में बम्बई उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि वाहन में बैठा व्यक्ति उतर कर जा सकता है।

  1. अरुमुगा नाडार, (1910) एम० डब्ल्यू० एन० 727.
  2. करतूरी नगम्मन, (1882) 1 वेयर 339.
  3. इन रे शन्मुघम, (1971) क्रि० लाँ ज० 182.
  4. नृपेन्द्र नाथ बसु बनाम किसेन बहादुर, (1952) 1 कल० 251.
  5. सुब्बाराव (108) 8 क्रि० लाँ ज० 212.
  6. सुन्दरेश्वर बनाम कन्थीमल, (1927) 50 मद्रास 673.
  7. सुब्रामनिया बनाम गणदिक्कम, (1963) II एम० एल० जे० 80.
  8. आई० एल० आर० 62 कल० 629.
  9. (1912) 15 बाम्बे एल० आर० 103.

तो वाहन के सम्मुख बाधा उत्पन्न करना सदोष अवरोध नहीं है। इसी प्रकार यदि कोई व्यक्ति अपनी बैलगाडी छोड़कर इच्छित रास्ते से जा सकता है किन्तु बैलगाड़ी ले जाने पर बाधा उत्पन्न कर दी जाती है तो यह नहीं कहा जायेगा कि उसे सदोष-अवरोध कारित हुआ। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने भी इसी प्रकार का विचार व्यक्त किया था।67


Posted in All, Indian Penal Code, LLB, LLB 1st Semester Notes Study Material Tagged with: , , , , , , , ,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*