Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 21 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 21 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 21 LLB Notes Study Material : Law LLB 1st Semester / 1st Year Notes Study Material The Indian Penal Code IPC All Topic PDF Download in Hindi English Gujarati Punjabi Marathi Language Available, LLB 1st Semester Important of Lawyer.

Indian Penal Code 1860 Offences Affecting Human Body LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 2 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 3 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 4 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 5 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 6 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 7 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 8 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 9 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 10 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 11 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 12 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 13 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 14 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 15 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 16 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 17 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 18 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 19 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 20 LLB Notes Study Material

LLB Book Notes Study Material All Semester Download PDF 1st 2nd 3rd Year Online

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 21 LLB Notes Study Material

Indian Penal Code 1860 Offences Relating Religion Part 21 LLB Notes Study Material

  1. खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना- उस दशा के सिवाय, जिसके लिए धारा 335 में उपबन्ध है, जो कोई असन, वेधन या काटने के किसी उपकरण द्वारा, जो यदि आक्रामक आयुध के तौर पर उपयोग में लाया जाए, तो उससे मृत्यु कारित होना सम्भाव्य है, या अग्नि या किसी तप्त पदार्थ द्वारा, या किसी विष या संक्षारक पदार्थ द्वारा, या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा, या किसी ऐसे पदार्थ द्वारा जिसका श्वास में जाना या निगलना या रक्त में पहुँचना मानव शरीर के लिए हानिकारक है, या किसी जीवजन्तु द्वारा स्वेच्छया घोर उपहति कारित करेगा, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

टिप्पणी

एक प्रकरण में तीन व्यक्तियों ने गुजर्पा नामक व्यक्ति को दौड़ाया। इन तीनों व्यक्तियों में से एक के पास घरया (काटने के लिये प्रयोग में आने वाला हथियार) नामक एक हथियार था जबकि अन्य निहत्थे थे। जो व्यक्ति घरया लिये हुये था, उसने मृतक पर दो तीन बार प्रहार किया जबकि शेष दोनों व्यक्ति उस पर पत्थर फेंक रहे थे। कारित उपहति के फलस्वरूप कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो गयी। उच्चतम न्यायालय ने अभिनित किया कि मुख्य अपराधी हत्या का दोषी है तथा उसे धारा 302 के अन्तर्गत दण्डित किया गया। जबकि शेष दोनों को स्वेच्छया उपहति कारित करने के लिये धारा 326 के अन्तर्गत दण्डित किया गया । । जहाँ अभियुक्त ने खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया घोर उपहति कारित किया है तथा चिकित्सीय साक्ष्य सुस्पष्ट नहीं है वहाँ अभियुक्त की दोषसिद्धि धारा 302/149 से बदल कर धारा । के अन्तर्गत कर दी जायेगी।38

6/149

  1. 2005 क्रि० लॉ ज० 898 (सु० को०).
  2. दज्या मोशया भील तथा अन्य बनाम महाराष्ट्र राज्य, 1984 क्रि० लॉ ज० 1728 (सु० का
  3. धन्ना चौधरी तथा अन्य बनाम बिहार राज्य, 1985 क्रि० लॉ ज० 1864; राजबीर बेनाम हर 1475. क्र० ली ज० 1864; राजबीर बनाम हरयाना राज्य, 1985 क्रि० लाँ ज०

आत्मा राम जिन्गाराजी बनाम स्टेट आफ महाराष्ट्र के बाद में अपीलांट समेत नौ व्यक्तिको भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302/सपठित धारा 149 के अधीन प्रहलाद नामक व्यक्ति की हत्या तथा अन्य अपराधों के लिये आरोपित एवं विचारण किया गया। नौ अभियुक्तों में से आठ को सेशन न्यायालय उच्च न्यायालय के द्वारा इस आशय के समरूप निष्कर्ष के आधार पर कि वे अपराध में शामिल दोषमुक्त कर दिया गया था और केवल अपीलांट को दोषसिद्ध किया गया था। साक्ष्य के अनुसार अन्य लोगों से कोई भी व्यक्ति विधि विरुद्ध जमाव रचित नहीं करता था। यह अधिनित किया गया कि साक्ष्य से यह भी स्पष्ट था कि केवल अभियुक्त/अपीलांट द्वारा कारित चोटों के कारण मृत्यु कारित नहीं हुई थी। इसके विपरीत चश्मदीद गवाहों तथा जिस डाक्टर ने अन्त्य परीक्षण किया था के साक्ष्यों से यह संकेत मिल रहा है कि मृतक को अन्य शस्त्रों से भी चोटें आई थीं और उसकी मृत्यु उन सभी चोटों के परिणामस्वरूप हुई थी। उपरोक्त तथ्यों के आधार पर धारा 302/14 भारतीय दण्ड संहिता के अधीन दोषसिद्धि को निरस्त कर दिया गया और अपीलांट को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 326 के अधीन घोर उपहति कारित करने के अपराध हेतु दण्डित किया गया है।

दौलत त्रिम्वाक शेवाले बनाम महाराष्ट्र राज्य40 वाले मामले में अपीलार्थी और मृतक और उसके परिवार को गांव के पड़ोस में भूमि थी। भूमि के संबंध में इन दोनों पक्षों के बीच विवाद था, जिसके कारण अपीलार्थियों ने सिविल वाद फाइल किया था और मृतक और उसके परिवार के विरुद्ध व्यादेश प्राप्त किया था। कि विवादित क्षेत्र में बोवाई नहीं कर सकते थे, किन्तु व्यादेश मिलने से पूर्व मृतक और उसके परिवार वालों ने जुलाई 1992 में विवादित भूमि में मुंग की फसल बो दिया। इस प्रकार संपत्ति मृतक के कब्जे में थी। व्यादेश के परिणामस्वरूप उक्त संपत्ति का कब्जा अपीलार्थी को नहीं प्राप्त हुआ। अभियुक्तों ने पुलिस की सहायता लेने का भी प्रयास किया, किन्तु विफल रहे । दिनांक 4-9-1992 को लगभग 10.00 बजे पूर्वान्ह जब मृतक और उसका भाई फसल काट रहे थे, अभियुक्तगण घातक हथियारों से सुसज्जित होकर खेत पर आए और मृतक तथा उसके भाई पर प्रहार किया, जिसके परिणामस्वरूप केशव की मृत्यु हो गई और उसका भाई बाबूराव (अभि० सा० 11) को क्षतियाँ कारित हुईं। विचारण न्यायालय ने अपीलार्थियों को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 34 के साथ पठित धारा 302 के अधीन दण्डनीय अपराध का दोषी पाया, जबकि अपीलार्थी। 2 और 4 को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 34 के साथ पठित धारा 324 के अधीन दोषसिद्ध किया। अपीलार्थियों ने दोषसिद्धि को उच्च न्यायालय में चुनौती दिया, परन्तु विफल रहे, इसलिये उच्चतम न्यायालय में यह अपील की गई है। अपीलार्थी ने अपनी संपत्ति के अधिकार पूर्ण कब्जे के लिये व्यक्तिगत प्रतिरक्षा के अधिकार का अभिवचन किया। किन्तु न्यायालय इस दलील से सहमत नहीं हुआ, क्योंकि अपीलार्थियों ने व्यादेश के आवेदन में स्वयं स्वीकार किया है कि मृतक पक्ष ने भूमि पर मुंग बोया था। इसलिये यह दलील कि वे अपनी संपत्ति की रक्षा कर रहे थे, मानने योग्य नहीं है। यह अभिनिर्धारित किया गया कि अभियुक्तगण खेत पर घातक हथियार लेकर आए, यह दर्शित करता है कि वे सामान्य आशय रखते थे, यह सामान्य आशय मृतक की हत्या करने का नहीं था। इसके अतिरिक्त यह तथ्य कि अभियुक्तों ने पुलिस की सहायता मांगा था, यह दर्शित करता है कि अभियुक्त प्रथम दृष्ट्या कानून को अपने हाथ में नहीं लेना चाहते थे। इसके अतिरिक्त यद्यपि कई अभियुक्त कुल्हाड़ी लिये थे, फिर भी शव-परीक्षा करने वाले चिकित्सक को मात्र एक ही अंतर्मुखी घाव मिला था और अभियोजन यह सुनिश्चित नहीं कर सका कि किसने वह घाव कारित किया था। अत: अभियुक्तों को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 34 के साथ पठित धारा 326 के अधीन गंभीर उपहति कारित करने के लिये दोषी पाया गया और अपीलार्थी सं० 2 और 4 को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 34 के साथ पठित धारा 324 के अधीन दोषसिद्ध किया गया, जैसा कि निचले न्यायालय ने आदेशित किया था।

चोवा मण्डल बनाम बिहार राज्य41 वाले मामले में अपीलार्थी और चार अन्य लोगों ने 23-6-1980 को अपने जमाव को लाठी और टांगी से लैस होकर विधिविरुद्ध जमाव में संगठित कर लिया और अभि० सा० 4 के खेत पर गये जहां अभि० सा० 4 और उसका चचेरा भाई शंकर मण्डल खेत की जोताई कर रहे थे। वहाँ उनसे लड़ाई झगडा किया और वे दोनों हमले के भय से भाग गये। इसके बाद अभियुक्त गांव में वापस लौट आए। रास्ते में उन्हें झालर मण्डल मिला, जो अभि० सा० 4 का चाचा है। यह पूछने पर कि क्या मामला है,

39, 997 क्रि० लाँ ज० 4406 (एस० सी०).

  1. 2004 क्रि० लाँ ज० 2925 (सु० को०).
  2. 2004 क्रि० लाँ ज० 1405 (सु० को०).

अपीलार्थी आग बबूला हो गया और झालर मण्डल के सिर पर लाठी से प्रहार कर दिया, परिणामस्वरूप उसे सिर में चोट लगी और वह गिर गया। इसके बाद अन्य सभी अभियुक्तों ने भी झालर पर प्रहार किया, जिसे अभि० सा० 4 उगान मण्डल ने देखा जिसने शोर मचाया। शोर सुनकर उसका पुत्र धानू मण्डल और भतीजा भुनेश्वर मंडल मौके पर पहुँचे और अभियुक्तों ने उन पर भी हमला कर दिया। जब अन्य ग्रामीण मौका वारदात (घटनास्थल) पर पहुँचे, तब अभियुक्त भाग गये। उगान मण्डल और अन्य घायलों को उसके रिश्तेदार अस्पताल ले गये, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। अभियुक्तों को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302 सपठित 34, 109, 148, 147 और 323 के अधीन आरोपित किया गया। विचारण न्यायालय ने उन्हें सिद्ध दोष किया और उच्च न्यायालय ने भी दोषसिद्धि को कायम रखा। इसलिये यह अपील उच्चतम न्यायालय के समक्ष की गई है। यह अभिनिर्धारित किया गया कि दूसरी घटना जिसमें मृतक की मृत्यु हुई, उसमें कोई अभियुक्त किसी विशिष्ट अभीष्ट (मंतव्य) के लिये झालर पर हमला करने हेतु प्रेरित नहीं किया गया। वह घटना क्षणिक आवेग में घटी, जबकि वह घटना मृत्यु कारित करने या ऐसी शारीरिक क्षति पहुँचाने के आशय से नहीं की गई थी, जिसके बारे में उन्हें जानकारी हो कि सामान्य परिस्थितियों में उससे मृत्यु कारित हो सकती है और वह मृतक के भतीजे से शत्रुता के कारण हुई जो कि मृतक द्वारा अनपेक्षित प्रश्न पूछने के कारण भड़के गुस्से के कारण घटी थी। यह स्पष्ट है कि अभियुक्त के कृत्य का यह अर्थान्वयन नहीं किया जा सकता कि वह गंभीर उपहति कारित करने से भिन्न कृत्य था। अतः अपीलार्थी अभियुक्त द्वारा कारित कृत्य भारतीय दण्ड संहिता की धारा 326 के साथ पठित धारा 34 के अधीन आता है और धारा 304 के अधीन नहीं आता।

मायण्डी बनाम राज्य द्वारा पुलिस निरीक्षकक के बाद में अपीलाण्ट पामग्रोव होटल चेन्नई की रसोई में कार्यरत कर्मचारी था। 8 फरवरी 2005 को लगभग 6.15 बजे प्रात: मृतक मानिका राजा बाला, जो होटल का मैनेजिंग डाइरेक्टर था, किचन में स्टोर चेक करने आया। जब स्टोर की चेकिंग करने का वाद मृतक अपने कार्यालय को वापस जा रहा था तब अपीलार्थी ने एक हंसिया (Sickle) से जिसे वह छिपाकर लिये था उसके ऊपर प्रहार किया। जब मृतक ने अपने को बचाने का प्रयास किया तब अपीलांट ने पुन: आक्रमण कर उसकी शरीर और हाथ पर अनेक चोटें कारित किया। कुछ लोग जो घटना स्थल के आसपास थे दौड़कर मृतक को बचाने के लिए आये परन्तु अपीलांट घटनास्थल से भाग गया। मृतक को घायलावस्था में अपोलो अस्पताल के गहन हृदयरोग कक्ष में भर्ती कराया गया। उसके पश्चात् भारतीय दण्ड संहिता की धारा 307 के अधीन प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गयी। बाद में दिनांक 9 फरवरी 2005 को रात्रि लगभग 3.30 बजे मृतक की मृत्यु हो गयी और उसके पश्चात् मामले को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302 के अधीन परिवर्तित कर दिया गया। मृतक को हृदय सम्बन्धी गम्भीर समस्या थी जिसका ज्ञान अपीलांट को नहीं था। मेडिकल साक्ष्य यह दर्शाता है कि उसकी एन्जियोप्लास्टी हुई थी परन्तु बावजूद इसके उसके पश्चात् भी उसे हृदय आघात हुआ। उन डाक्टरों ने जो उसकी देखभाल कर रहे थे उनकी राय यह थी कि अपीलांट द्वारा कारित मात्र इन चोटों से मृत्यु नहीं हो सकती थी। यह अभिनिर्धारित किया गया कि यह मामला भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302 के बजाय धारा 326 के अन्तर्गत आयेगा क्योंकि अपीलांट का मृतक की मृत्यु कारित करने का न तो आशय था और न उसको यह ज्ञान था कि ऐसी चोटों से मृत्यु कारित हो सकती है। |

41खा 326-क. अम्ल, आदि का प्रयोग करके स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना-जो कोई किसी व्यक्ति के शरीर के किसी भाग या किन्हीं भागों को उस व्यक्ति पर अम्ल फेंककर या उसे अम्ल देकर या किन्हीं अन्य साधनों का, ऐसा कारित करने के आशय या ज्ञान से कि यह संभाव्य है कि वह ऐसी क्षति या उपहति कारित करे, प्रयोग करके स्थायी या आंशिक नुकसान कारित करता है या अंगविकार करता है। या जलाता है या विकलांग बनाता है या विद्रूपित करता है या नि:शक्त बनाता है या घोर उपहति कारित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम की नहीं होगी किंतु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगाः । |


Posted in All, Indian Penal Code, LLB, LLB 1st Semester Notes Study Material Tagged with: , , , , , , , ,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*