CCC What is an Electronic Mail Study Material in Hindi

CCC What is an Electronic Mail Study Material in Hindi

CCC What is an Electronic Mail Study Material in Hindi : NIELIT (DOEACC) CCC Study Material in Hindi and English की इस वेबसाइट में आप सभी अभ्यर्थियो का फिर से स्वागत करते है आज आप सीखने जा रहे है की इलेक्ट्रॉनिक मेल क्या (What is an Electronic Mail) इसका इस्तेमाल कैसे करते है | इस पोस्ट को हम NIELIT (DOEACC) CCC Study Material की जरिये आपको बताने जा रहे है जो CCC Exam Paper में बहुत ही महत्त्वपूर्ण साबित होते है | CCC Study Material in English की पोस्ट हम आपको पहले ही शेयर कर चुके है | जिसका हमने आपको CCC Question Answer and CCC Solved Sample Question Paper की पोस्ट भी शेयर की थी | CCC Study Material पढ़ने के बाद आपको हम आने वाली अपनी अगली पोस्ट में CCC Question Answer Exercise भी शेयर करेंगे जो बहुत ही महत्त्वपूर्ण है | CCC Exam Question Paper के लिए CCC Question Paper With Answer पढ़ना भी जरूरी होता है जिसे हम आगे की पोस्ट में शेयर करेंगे |

CCC What is an Electronic Mail Study Material in Hindi

CCC What is an Electronic Mail Study Material in Hindi

इलेक्ट्रॉनिक मेल क्या है?   What is an Electronic Mail? (CCC Study Material)

टेलीकम्यूनिकेशन के द्वारा कम्प्यूटर स्टोर्ड मैसेजेज का आदान-प्रदान ई-मेल (इलेक्ट्रॉनिक मेल) कहलाता है। ई-मेल को ईमेल शब्द से भी निरूपति किया जाता है। ई-मेल प्रायः ASCII  टेक्स्ट मे एनकोडिड होते हैं। ASCII एक कम्प्यूटर पर सूचना प्रदरशित करन वाला यूनिव्सल सिस्टम है जिसमें प्रत्येक अक्षर की कोई ना कोई बाइनरी वैल्यू आँकी जाती है। ASCII की फुल फोर्म अमेरिकन स्टैंडर्ड कोड फॉर इन्फॉर्मेशन इंटरचेंज (American standard code for information interchange) है। यधपि आप इसके साथ नॉन-टेक्स्ट फाइल भी भेज सकते हैं। ये फाइल ग्राफिक इमेजिज और साउण्ड फाइल्स अटैचमेंट क रूप में होती है और ये बाइनरी स्ट्रीम्स में होती हैं। ई-मेल इंटरनेट के सबसे प्रथम उपयोगों में है और वह अब भी इंटरनेट में सबसे ज्यादा प्रयोग में आने वाली ऑब्जेक्ट है। इंटरनेट के ट्रैफिक की एक बड़ी प्रसेन्टेज ई-मेल ही है। इंटरनेट में ऑनलाइन सर्विस प्रोवाइडटर यूजर्स व इंटरनेट के बाहर के यूजर्स के बीच भी ई-मेल का आदान-प्रदान होता है।

बाइनरी नम्बर प्रणाली वह प्रणाली है जोकि कम्प्यूटर के द्वारा प्रयोग की जाती है। यह केवल 0 और 1 के द्वारा सारी सूचना को कम्प्यूटर में रखने व कम्प्यूटर के मझने में प्रयोग आती है।

चित्र  8.3  ई-मेल की वींडो जिसमें एड्रेस, स्जेक्ट व कंटेंट्स हैं

CCC Study Material

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इंटरनेट के बढ़ते प्रयोग के साथ ई-मेल के प्रचलन में भी व्रध्दी हुई है। यह भी कहा जा सकता है कि ई-मेल के प्रचलन ने इंटरनेंट के प्रयोग को बढ़ावा दिया है। ई-मेल आज दुनिय भर में सर्वाधिक लोकप्रिय संचार साधन का रूप ले चुका है। ई-मेल की लोकप्रियता एवं इसके बढ़ते प्रयोग का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकत है कि पहले लोग व्यक्त के घर या ऑफिस का पता पूछते थे, अब उसके ई-मेल का पता पूछतें हैं।

वैसे तो ई-मेल के विकास एवं इसके आधुनिक रूप प्रदान करने में कई वैज्ञानिकों के योगदान रहा है, किन्तु ई-मेल की शुरुआत करने के कारण संयुक्त राज्य अमेरिका के कम्प्यूटर वैज्ञानिक रे टॉमलिंसन को ई-मेल का जनक कहा जाता है। उन्होंने सर्वप्रथन 1972 ई.में सिम्पल मेल ट्रांसफर प्रोटोकॉल तकनीक का प्रोयग कर दूसरे कम्प्यूटर तक इलेक्ट्रॉनक मेल प्रोषित करने में सफलता प्राप्त की थी। इसके बाद सामान्य प्रयोक्ताओं के लिए भी ई-मेल सेवा की शुरुआत हुई।

ई-मेल पता के तीन घटक होते हैं-यूजरनेम, प्रतीक a एवं डोमेन नेम। उदाहरण के तौर पर SDIBESH  a gmail.com में SDIBESH यूजरनेम एवं gmail.com. डोमेन नेम है जिसके बीच में a प्रतीक है। यूजरनेम से इस बात का पता चलता है कि सन्देश भेजन वाला कौन है या किसके पास सन्देश जाना है एवं डोमेन नेम ई-मेल सेवा प्रदान करन वाले डोमेन का सूचक होता है। ई-मेल के आविष्कार के बाद स अब तक इस तकनीक में काफी प्रगति हुई है, इसके माध्यम से अब डिजिटल दस्तावेजों एवं चित्रों या वीजियो को भी संलग्न कर कई ई-मेल्स के साथ भेजा  जा सकता है। जीमेल, हॉटमल, याहूमेल इत्यादि ई-मेल सेवा प्रोदाताओं के नाम हैं। किसी भी ई-मेल सेवा प्रदाता के मेल वाले वेबसाइट पर साइन-अप कर नये ई-मेल पते का निर्माण किया जा सकता है। कुछ सीमा तक यह सेवा बिल्कुल निःशुल्क है। ई-मल पते का निर्माण करन के बाद व्यक्ति को उस पते पर सन्देश भेजने एवं उसे सुरक्षित रखने के लिए कुछ स्थान प्रदान किया जाता है।

ई-मेल के कई लाभ हैं। इसका प्रोग करना अत्यधिक सरल होता है। इसके माध्यम से हर रोज काफी संख्या में दस्तावेजों क व्यवस्थित कर प्रोयोग में लाया एवं उन्हें सुरक्षित रखा जा सकता है। ई-मेल के माध्यम से भेजे गए सन्देश सुरक्षित तो रहते ही हैं, साथ में भेजे गए समय एवं दिनांक को भी इसमें सुरक्षित रखा जाता है। जो बाद में बहुत उपयोगी साबित होता है। ई-मेल पता इंटरनेट पर व्यक्ति की पहचान के रूप में भआ कार्य करता है। इंटरनेट की कई वेबसाइटों पर पंजीकरण करवाने में ई-मेल पते की आवश्यकता पड़ती है। ई-मेल से होने वाला एकं बड़ा लाभ इसकी गति है। इसके माध्यम से तीव्र गति से प्रथ्वी के किसी भी कोने में सन्देशों को भेजा जा सकता है। ई-मेल के माध्यम से प्राप्त सन्देशों को व्यवस्तथ करना भी आसान होता है। आलश्यकता हो, तो उसे पढिए अथवा मिटा दिजिए। ई-मेल के माध्यम से संचार करना सुरक्षित एवं विश्वासनीय होता है। किसी विशेष व्यक्ति के ई-मेल पते पर भेज गए सन्देश के खोने का खतरा नहीं होता। ई-मेल से प्राप्त सन्देश एवं संलग्न डिजिटल दस्तावेज को आगे अन्य पते पर ज्यों-का त्यों अग्रसारित भी किया जा सकता है। ई-मेल प्राप्त होने की स्थिति में उसी सन्दर्भ के सात उका जवाब देने का भी विकल्प प्रयोगकर्ता क पास जाता है। प्राप्त मेल को प्रिंटर के माध्यम से प्रिंट भी किया जा सकता है।

पर्यावरण की द्रष्टिकोण से देखा जाए तो संचार के लिए पारम्पारिक डाक सेवा के बदले ई-मेल का प्रयोग करने से कागज की बचत होती है। पेडो की कटाई पर नियन्त्रण के लिए कागज के पयोग को कम करने की आवश्यकता है। पारम्परिक डाक से प्राप्त कागजी दस्तावेजों की तुलना में भी ई-मेल के दस्तावेजों को सम्भालना अत्यन्त आसान होता है।  ई-मेल कई विज्ञापन कम्पनियों के लिए वरदान साबित हा है। इसके प्रयोग से विज्ञापन करना भी आसान हो गया है। इसका प्रयोग अब व्यवसायों में भी खूब होने लगा है।

ई-मेल से यदि कई प्रकार क लाभ हैं, तो इससे नुकसान होने की भी सम्भावना बनी रहती है। यदि किसी ई-मेल का पासवर्ड किसी अन्य व्यक्ति को पता चल जाए तो वह इसका दुरुपयोग कर सकता है। इसलिए ई-मेल सुवीधा का प्रयोगग करने वाले व्यक्ति को इस सन्दर्भ में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता पड़ती है। इसके अतिरिक्त –मेल पते को हैक किए जाने का खतरा भी बना रहता है। हैकिंग से बचने के लिए समय-समय पर पासवर्ड में परिवर्तन करते रहने की आवश्यकता पड़ती है। ई-मेल के माध्यम से कम्प्यूटर वायरसों के हमले कीम भी समभावना रहती है। अब तक दुनिया में जितने भी कम्प्यूट वायरोसों का हमला हुआ, उनेक प्रसार में ई-मेल की भूमिका ही मुख्य थी। एन्टी वायरस सॉफ्टवेयर का प्रयोग कर कम्प्यूटर वायरसों से होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। ई-मेल पर आने वाले स्पैम मेल भी ई-मेल से होने वाली परेशानी का एक कारम होते है। ई-मेल की सबसे बड़ी खामी यह है कि इसके माध्यम से एक बार में निश्चित सीमा तक ही दस्तावेजों एवं डिजिटल सामग्रियों को सम्पर्षित किया जा सकता है। ई-मेल की एक और कमी यह है कि ई-मेल स् प्राप्त दस्तावेजों को कानूनी तौर पर प्रामाणिक नहीं  माना जाता। इसले अब तक कानूनी दस्तावेजों को पारम्परिक डाक से ही भेज जाता है।

संचार के सभी माध्यमों एवं सुविधाओं का समाज पर व्यापक प्रभाव होता है। नई तकनीक के प्रचलन से कई प्रकार की सुविधाएँ प्राप्त होती हैं, तो इससे कुछ नुकसान होने की सम्भावना बनी रहती है। ठीक यही बात ई-मेल के साथ भी है। यदि सावधानी से इसका प्रयोग किया जाए तो निश्चित रूप सि इससे होने वाले नुकसान से हचा जा सकता है। एन्टी-वायरस सॉफ्टवेयर का प्रयोग, समय-समय पर इनबॉक्स की जाँच, स्पैम को मिटाते रहना, समय-समय पर पासवर्ड को बदलना एवं अवाँछित ई-मेल से बचने जैसे उपायों से ई-मेल से होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। ई-मेल की सुवीधा मनुष्य के लिए विज्ञान का वरदान साबित हुई है। इसके माध्यम से न केवल विभिन्न प्रकार की सूचनाओं तक मनुष्य की पहुँच हुई है, बल्कि उसे प्राप्त करना भी उसके लिए आसान हो गया है। पहले ई-मेल से प्राप्त करने के लिए इंटरनेट के कनेक्शन एवं कम्प्यूटर की आवश्यकता पड़ती थी। अब ऐसी सुविधा प्रदान करने वाले मोबाइलों का भी निर्माण होने लगा है। संचार क्रान्ति में इंटरनेट एवं ई-मेल की मुख्य भूमिका है।

इलेक्ट्रॉनिक मेल प्रोग्राम्स, अक्सर लोकल एरिया नेटवर्क (local area network) सॉफ्टवेयर या, ऐडॉ-ऑन (add –on ) ऑप्शन्स के रूप में आते हैं। या फिर ये इंडीपेंडेट (स्वतंत्र) प्रोग्राम्स होते हैं जो एक खास नेटवर्क एनवायरनमेंट (परिवेश) में काम करने के लिए डिजाइन किए जाते हैं।

ई-मेल कैसे कार्य करता है? (CCC Study Material in Hindi)

जिस व्यक्ति के सथ आप कम्यूनिकेट करते हैं, वह इंटरनेट पर कोई अन्य यूजर हो सकता है, कोई ऐसा व्यक्ति जो उसी कम्प्यूटर सिस्टम, जोसका प्रयोग आप कर रहे हैं, का प्रयोग कर रहा होता है, या कोई ऐसा व्यक्ति हो सकता है जो हजारों मील दूर स्थित एक कम्प्यूटर सिस्टम पर होता है।

चित्र  8.4 मेल भेजना

 

CCC Study Material in Hindi

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ई-मेल, ऐसे कम्प्यूटर सिस्टम के बीच ट्रांसमिट होता है, जो मैसेजेज को ऐक्सचेंज (आदान-प्रदान) करते है या उन्हें दूसरी साइट्स पर भेज देते हैं। ई-मेल ऐक्सचेंज के इस कार्य के लिए ये कुछ निश्चित इंटरनेट प्रोटोकॉल्स (internet protocols) के रूल्स (नियम), जो खास इसी कार्य के लिए ही बनाए गए हैं, को फॉलो (follow) करते हैं। आपको बहुत सी बातों को विस्तार में जानने की जरूरत नहीं है, जो कि कम्प्यूटर का काम है। लेकिन, आप को इस बारे में थोड़ी जानकारी अवश्य होनी चाहिए कि ई-मेल किस प्रकार कार्य करता है। ई-मेल भेजना वैसा ही है, जैसा किसी चीज को पोस्टल सर्विस (डाक सेवा) द्वारा भेजना।

एक पोस्टल सर्विस द्वारा, मेल भेजने के स्टेप्स इस प्रकार हैं।

  • लेटर को लिखो या पैकेज को बनाओ।
  • इस पर एड्रेस लिखो।
  • उपयुक्त पोस्टेज में भेजो या इसे भेजने का खर्च दो।
  • इसे एक पोस्ट बॉक्स में ड्रॉप करो ताकि यह सही रास्ते से जाकर, सही एड्रेस पर डिलीवीर किया जा सके।

अपको इस बात कि चिंता करने की जरूरत नहीं है कि इसे डिलीवर करने में कौन-से तरीकों का प्रयोग होना है या कौन-सा रास्ता अपनाना है। प बस इस भेजे जाने वाली चीज को तैयार करो, इस पर एड्रेस लिखो और पोस्ट ऑफिस को दे दो।

एक ई-मेल भेजने के स्टेप्स हें

  1. एक ई-मेल् प्रोग्राम स्टार्ट करो।
  2. ई-मेल कहाँ भेजना है, उसका एड्रेस लिखो।
  3. ई-मेल प्रोग्राम का प्रयोग करके एक मैसेज कम्पोज करो।
  4. मैसेज भेजने के लिए एक कमाण्ड दो।

आपने शायद ध्यान दिया होगा कि, हमनि पोस्टेज जोड़ने और कीमत चुकाने के भाग को छोड़ दिया है। प्रत्येक यूजर, कई ऑर्गनाइजेशन्स जैसे — स्कूल्स, कम्पनीज जिनमें इंटरनेट ऐक्सेस है, में ई-मेल के लिए की भी प्रति मैसेज फी (per message fee) पे (pay) नहीं करते हैं।

आप कई ई-मेल प्रोग्राम का प्रयोग एक मैसेज को एड्रेस करने, कम्पोज करने और भेजने के लिए करते हैं। ई-मेल प्रोग्राम्स को मेल यूजर एजेन्ट्स कहा जाता है क्योकि ये यूजर के लिए काम करते हैं। यूजर एजेंट आपको मैसेज तैयार करके भेजने की अनुमति देते हैं औऱ आपके पास जो मेल आते हैं उके साथ भी कार्य करन की आज्ञा देते हैं। ई-मेल प्रोग्राम, आप के और कम्प्यूटर सिस्टम के साथ go-between का कार्य करते हैं और कम्प्यूटर सिस्टम मेल की डिलीवरी और रिसीविंग को हैंडल करते हैं।

इंटरनेट पर मैसेजेज निम्न तरीके से एक साइट से दूसरी तक भेजे जाते हैं।

जब प मैसेज को कम्पोज करते हैं तब यह एक पीस  (piece) में होते है, लेकिन जब यह इंटरनेट पर भेजा जाता है, तब यह कई टुकड़ों (pieces) में बँट (divide) जाता है, जिन्हें पैकेट्स कहा जाता है। पैकेट्स की संख्यां, मैसेज के साइज पर निर्भर होती है।

  • प्रत्येक पैकेट में अन्य चीजों के अलावा, निम्न चीजें भी होती हैं।
  • जो व्यक्ति मेल भेजता है (सेंडर) उसका ई-मेल एड्रेस
  • मैसेज के कैरेक्टर्स 1 से लेकर 1500 के बीच होने चाहिए।

पैकेट्स को कई इंटरनेट साइट्स से होकर गुजरना पड़ता है अंत में ये डेस्टीनेशन तक भेजे जाते हैं। इंटरनेट को हजारों नेटवर्क्स और लाखों कम्प्यूटर्स मिलकर बनाते हैं और पैकेट्स एक सिस्टम से दूसर सिस्टम में पास होते जाते हैं। प्रत्येक साइट पैकेट को ऐक्सेप्ट करती है लेकिन मैसेज जो अन्य ऐडेस पर जान के लिए निश्चित है, को पास कर देती है। पैकेट्स ड्स्टीनेशन तक कीसी भी क्रम में यात्रा करके पहुँच सकते हैं और उन्हे एकर रास्ते से जाना जरूरी नहीं है। जबआप एक रिमोट साइट से कम्यूनिकेट करते हैं, तब आप सोच सकते हैं कि आपका यह डायरेक्ट कनेक्शन है, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। डेस्टीनेशन पर पैकेट्स को जमा कर के क्रम में सजा दिया जाता है जिससे ई-मेल ठीक उसी रूप में दिखती है, जिसमें वह भेजी गई थी। यदि पैकेट्स में कोई ऐरर्स (गलतियाँ) होते हैं या कुछ पैकेट्स खो जाते रहैं, ब डेस्टीनेशन, वापस सोर्स को रिक्वेस्ट भेजता है कि मैसेजेज के फिर से (रीसेंड) भेजें। यह सारा SMTP के हिसाब से होता है जहाँ SMTP का अर्थ है सिंपल मेल ट्रांसफर प्रोटोकॉल जो एक प्रोटोकॉल है जिस का प्रयोग इंटरनेट द्वारा, कम्प्यूटर सिस्टम्स के बीच मैसेजेज को ट्रांसपोर्ट करने के लिए किया जाता है। SMTP, TCP (ट्रांसमीशन कंट्रोल प्रोटोकॉल) का प्रयोग करता है, जो कम्यूनिकेशन को एक विश्वसनीय साधन प्रदान करता है।

जब आप अपनी ई-मेल पढ़ते है, तब एक बार फिर से आप एक प्रोग्राम का प्रयोग करते है (एक मेल-यूजर एजेन्ट), जो आपको उन मैसेजेज के साथ कार्य करने में मदद करता है, जिनका आप अपने लिए इंतजार कर रहे होते हैं। कई सिस्टम्स में आपसे कहा जाता है कि यदि आपके पास लॉगइन (login) करते समय ई-मेल है, तो इंटरनेट से सम्पर्क स्थापित करने के लिए या तो आप सिस्टम में ऐक्सेस करो या अपने सिस्टम को स्टार्ट करो। ई-मेल मैसेज कभी भी पहुँच सके हैं। ये उस फाइल में जुड़े जातै हैं, जो उस डायरेक्ट्री का हिस्सा होती है, जिसमें आपके सिस्टम के सभी ई-मेल को होल्ड (hold) करके रखने की क्षमता होती है। ई-मेल मैसेज को बनाने वाले पैकेट्स सिस्टम तक पहुँचते हैं, ये ऐसेम्बल (assemble) किए जाते हैं और फिर प्रत्येक यूजर की फाइल में जोड़ दिए जाते हैं। फाइल को अक्सर एक सिस्टम मेल बॉक्स कहा जाता है। यह आप को ऐड्रेस किए गए सभी सैसेजेज जो सिस्टम में होते हैं, को को होल्ड करता है और इस तरह से आप अपना मेल पढ़स सकते है। यदि किसी कारण से, आपका मेल बॉक्स खराब या करप्टेड (corrupted) हो जाता है या यह बदल जाता है, तो आप अपना मेल जो ई-मेल को ऐलोकेट (allocate) करने वाली डायरेक्ट्री में होता है, नहीं पढ़ सकते है। आमतौर पर कई सारे मैसेजेज को होल्ड करने के लिए पर्याप्त स्पेस होता है, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि आप पूराने ई-मेल मैसेजेज और जिन्हें आप पढ़ चुके हैं, को डिलीट कर दें ताकि सबसे ई-मेल के लिए जगह बनाई जा सके।

 ई-मेल के लाभ और सीमाएँ    Advantages and Limitations of Mail (NIELIT DOEACC CCC Study Material)

लाभ Advantages   ई-मेल के, कम्यूनिकेशन के किसी भी दूसरे रूप की अपेक्षा, बहुत से लाभ हैं। यह तेज एवं सुविधाजनक है तथा अनुचित हस्तक्षेप नहीं करता है अर्थात् यह नॉनइंट्रसिव (nonintrusive) है।

  • आप इंटरनेट पर तेजी से किसी के भी साथ कम्यूनिकेट कर सकते हैं। ई-मेल आमतौर पर इसके डेस्टीनेशन तक कुछ मिनट या सेकण्ड्स में ही पहुँच जाता है।
  • किसी के साथ कम्यूनिकेट करने में आने वाली लागत का दूरी के साथ कुछ लेना-देना नहीं है, और कई स्थितियों (कैसेज), में यह लागत मैसेज की साइज पर भी निर्भर नहीं होती है। यदि आप ई-मेल का चार्ज देते हैं, तो यह कीमत, मैसेजेज की संख्या पर आधारित होती है, न कि इन्हें कहाँ भेजा जाता है, उस पर। इसके अलावा ये कीमत, मैसेजेज की संख्या पर आधारित होती है ना कि इन्हें कहाँ भेजा जाता है, उस पर। इसके अलावा ये कीमत अक्सर उतनी ही होती है, चाहें मैसेजेज की साइज कम ज्यादा कुछ भी हो। ई-मेल दोस्तों, सहकर्मियों या बिजनेस ऐसोशिएट्स के साथ कम्यूनिकेट करने का सबसे सस्ता तरीका है, जो इस बात से सम्बन्धित नहीं होता है कि वे शारीरिक रूप से (फिजिकली) कहाँ स्थित (लोकेटेड) होते हैं।
  • आप लेटर्स, नोट्स, फाइल्स, डाटा या रिर्पोट्स सभी को एक जैसी तकनीक का प्रयोग करके भेज सकते है। एक बार जब आप सीख जाते हैं कि आपको ई-मेल प्रोग्राम का प्रयोग कैसे करना है तो प्रत्येक चीज उसी तरीके से भेजी जाती है।
  • आप जब ई-मेल भेजते हैं तो इस बात की चिंता न करें कि आप किसी की बीच में रोक रहे हैं। एक कम्प्यूटर सिस्टम जो इंटरनेट के साथ कम्यूनिकेट करता है, के द्वारा ई-मेल भेजा और डिलीवर किया जाता है। यधपि यह किसी के मेल बॉक्स में रखा जाता है लेकिन रेसीपिएंट का कार्य कर सकते हैं। आपको ई-मेल के पहुँचने के समय पर रुकना नहीं पड़ता हैं। इसे ऐसे समय पर लिखना और भेजना बिल्कुल भी जरूरी नहीं है जब प को पता हो कि रेसीपिएंट उपलब्ध होगा।
  • ई-मेल ऐनॉनीमस (गुमनाम) नहीं हो सकता है, कारण प्रत्येक मैसेज में भेजे जाने वाले व्यक्ति का रिटर्न एड्रेस होता है, आप क इंटरनेट एड्रेस वाले किसी भी व्यक्ति को ही लिख सकते हैं।

सीमाएँ  Limitation (CCC Study Material in PDF)

  • ई-मेल, निजी हो, यह आवश्यक नहीं है। चूँकि मैसेजेज एक सिस्टम से दूसरे में भेजे जाते हैं, और कभी-कभी नेटवर्क्स पर स्थित कई सिस्टम्स पर, अतः आपके पास कई अवसर होते हैं जब प ई-मेल को इंटरसेप्ट (intercept) करके पढ़ सकते हैं। कई तरह के कम्प्यूटर सिस्टम्स में प्रोटेक्सन्स (protections) बिल्ट-इन होते हैं ताकि यूजर्स को अन्य यूजर्स के ई-मेल को पढ़ने से रोका जा सके, लेकिन एक रसिस्टम ऐडमिनिस्ट्रेटर के ले यह अभी भी सम्भव है कि वह एक सिस्टम पर ई-मेल पढ़ सके या किसी कम्प्यूटर सिस्टम की सूरक्षा को बाईपास कर सके।
  • यदि आप एक इंटरेस्ट ग्रुप जाइन करते हैं तो यह सम्भव है कि आपके पास ऐसे मैसेजेज की भरमार होगी, जो आपके किसी काम के नहीं होंगे। जिस तरह आप अन्य प्रकार की जंक मेल प्राप्त करते हैं, उसी प्रकार आप जंग ई-मेल भी प्राप्त कर सकते हैं। कुछ लोग, अपने प्रोडक्ट मार्केट करने या ऐडवाटांइज करनके के लिए भी ई-मेल को ही सबसे सस्ता तरीका मानते है। इनमें से किसी भी केस में आपको ऐक्टिव स्टोप लेना होग ताकि आप रिसीव किए गए ई-मेल को डिलीट कर दें और इसे पहली जगह पर भेजे जाने से रोक दें।

चित्र     8.5    पोस्टल मेल फॉर्मेट

CCC Postal Mail Format Study Material in Hindi

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चित्र 8.6     ई-मेल फॉर्मेट

CCC Email Format Study Material

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  • ई-मेल में धोखाधड़ी भी हो सकती है, यह कॉमन नहीं है, लेकिन सेंडर के एड्रेस के साथा धोखै करना या उसे बदलना सम्भव है। कुछ ई-मेल जो आपको मिलती हैं, उनका सोर्स, हो सकता है कि आप कन्फर्म करना चाहें।
  • कुछ ई-मेल सिस्टम्स, केवल टेक्स्ट फाइल्स ही भेज या प्राप्त कर सकते हैं। अधिकांश ई-मेल सिस्टम्स, केवल टेक्स्ट और कैसेक्टर फॉर्मेट वाले मैसेजेज के साथ ही डील कर सकते हैं। यदि आप इमेजेस, प्रोग्राम्स या फाइल्स, जो वर्ड प्रोसेसिंग प्रोग्राम्स द्वारा बनाए गए हों, को भेजना या पाना चाहेत हैं, तो कुछ एक्स्ट्रा स्टेप्स करने होंगे। लेकिन कुछ ई-मेल प्रोग्राम्स द्वारा बनाए गए हों, को भेजना या पना चाहेत हैं,र तो कुछ एक्स्ट्रा स्टेप्स करकने होंगे। लेकिन कुछ ई-मेल प्रोग्रांम्स MIME ( मल्टीपरपज इंटरनेट मेल ऐक्सटेंशन्स) का प्रयोग करते हैं और ये मैसेजेज के साथ कई तरह से कार्य कर सकते हैं।

ई-मेल मैसेज की बनावट   Structure of E-mail Message  एक ई-मेल मैसेज बाइनरी डाटा से बना होता है जो आमतौर पर ASCII  टेक्स्ट फॉर्मेट में होता है। ASCII स्टैंडर्ड है जो किसी भी कम्प्यूटर को टेक्स्ट पढ़ने के लिए सक्षम बनाता है। चाहें उसका सिस्टम या हार्डवेयर कोई भी हो। ASCII कोड उन कैरेक्टर्स का वर्णन करते हैं, जिन्हें आप सक्रीन पर देखते हैं।

आप पिक्चर्स, एक्जीक्यूटेबल प्रोग्राम्स, साउण्ड, वीडियो और अन्य बाइनरी फाइल्स अपने ई-मेल मैसेज  में अटैच कर सकते हैं।

चित्र  8.5. व 8.6 में एक पोस्टल मेल मैसेज और एक ई-मेल मैसेज के बीच समानता दिखाई गई है। To , लाइन में आप जिन्हें मैसेज भेज रहे हैं, उनका एड्रेस टाइप करते हैं। एड्रेस को बहुत ही सख्त नियमें के अनुसार ही टाइप करना पड़ता है। यदि आपने क ही अक्षर टाइप किया है या सिंटैक्स  (syntax) गलत है तो पका मैसेज निर्धारित रेसीपिएंट तक नहीं पहुँचेगा। आपका ई-मेल एड्रेस from: लाइन पर दिखाई देगा। इस एड्रेस का प्रयोग करके, मैसेज को पाने वाले अपना उत्तर आपको भजे सकेंगे।

स्बजेक्टः लाइन पर, प अपने मैसेज का सब्जेक्ट या बहुत ही संक्षित सारांश टाइप कर रसकते हैं। मैसेज के सबसे नीचे “ सिग्नेचर” एरिया होता है जिसमे आपके बारे में व्यक्तिगत सूचना होती है। कुछ मले प्रोग्राम, आपके द्वारा भेजे जाने वाले प्रत्येक मैसेज के अंत में ऑटोमैटिक रूप से इस सिग्नेचर को अपेड (append) करते हैं। सिग्नेचर एरियाज की जरूरत नहीं होती है और ये उस व्यक्ति की पसंद पर निर्भर करता है, जो ई-मेल मैसेज बनाता है। सिग्नेचर वाला भाग 5 लाइन्स से ज्यादा नहीं होना चाहिए। एक ई-मेल मैसेज के 5 सेक्शन्स नीचे दिए गए हैं

  • ई-मेल एड्रेस
  • हैडर
  • बी
  • सिग्नेचर ( ऑप्शनल)
  • अटैचमेंट्स ( ऑप्शनल)

चित्र 8.7 में एक ई-मेल मैसेज के मुख्य सेक्शन्स दिखाए गए हैं। नोट करें कि सिग्नेचर और अटैचमेंट्स ऑप्शनल होते हैं। कई मैसेजेज उन्हें नहीं दिखाते हैं और कुछ ई-मेल ऐप्लिकेशन उनका सपोर्ट ही नहीं करते हैं।

चित्र  8.7 ई-मेल मैसेज के मुख्य सेक्शन्स

CCC Email Massage Main Section Study Material

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ई-मेल सिस्टम के विभिन्न कार्य Different Tasks of E-mail System  सामान्यतः समस्त ई-मेल सिस्टम (e-mail system)  निम्नलिखित पाँच कार्यो का समर्थन करते हैं।

  • कम्पोजिशन Composition  इसका आशय मैसेजेज (Messages) को क्रिएट करने की प्रकिया से है। यधपि मैसेज को टाइप करने के लिए किसी भी टेक्स्ट एडिटर का प्रयोग किया जा  सकता है, परन्तु ई-मेल सिस्टम, मैसेज हेतु एड्रेस को निर्दिष्ट करने और मैसेज में हैडर फील्ड्स (header fields)) को अटैच (attach) करने में प्रयोगकर्ता की सहायता करता है। उदाहरण के लिए, प्रयोगकर्ता दावारा किसी मैसेज का प्रत्योतर देते समय, ई-मेल सिस्टम स्वतः ही मैसेज में उचित स्थान पर उस व्यक्ति का ई-मेल एड्रेस प्रयोग कर सकता है, जिसने मेस भेजा हो। इसके लिए ई-मेल सिस्टम भेज गए मेल से उस व्यक्ति अथवा संस्था का एड्रेस स्वतः निकाल लेता है, जिसने मेल भेजा था।
  • ट्रांसफर Transfer इसका आशय मैसेजेज (messages) को प्रेषक (sender) से प्राप्तकर्ता (receiver) तक पहुँचने से है। इसके लिए प्रेक और प्राप्तकर्ता अर्थात् लक्ष्य (destination) के मध्य किसी मध्यस्थ, जोकि ई-मेल सेवा प्रादाता गा सर्वर होता है, के माध्यम से एक कनेक्शन स्थापित करने, मैसेजेज को भेजने और कनेक्शन को रिलीज (release)  करने की आवश्यकता होती है। ये कार्य ई-मेल सिस्टम द्वारा स्वतः किए जाते इसके लिए प्रयोगकर्ता को कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं होती है।
  • रिपोर्टिग Reporting इसका आशय ई-मेल प्रेषक (sender) को यह सूचित करने से है कि उसके द्वारा भेजा गया मैसेज लक्ष्य अर्थात् प्राप्तकर्ता को वितरित (deliver) अथवा निरस्त (reject) कर दिया गया है अथवा वह गलत रास्ते में ही नष्ट हो गया है।
  • डिस्प्लेइंग Disposition  इसका आशय प्रयोगकर्ता द्वारा मैसेज को प्राप्त करने के पश्चात् की जाने वाली प्रक्रिया से है। प्राप्तकर्ता मैसेज को पढ़ने से पूर्व उसे हटा अर्थात् throw कर सकता है अथवा मैसेज को उपरोक्त सम्भावनाओं को कार्यान्वित करने की सुविधा देता है, वरहन् यह प्रोयगकर्ताको सुरक्षित किए गए मैसेजेज को पुनः प्राप्त करने और पुनः पढ़ने, उन्हें किसी अन्य व्यक्ति को फॉरवर्ड (forward) करने अथवा अन्य विधिय से प्रोसेस करने की भी सुविधा प्रदान करता है।

उपरोक्त कार्यो के अतिरिक्त अधिकांश ई-मेल सिस्टम, प्राप्त होने वाले ई-मेल (incoming mail)  को संचित मेवबॉक्सेज (mailboxes) को क्रिएट करने औरडिलीट करने,मेलबॉक्स में मैसेजेज को इन्सर्ट (insert) और डिलीट करने तथा मेलबॉक्सेज के कन्टेन्ट्स की निगरानी करने के लिए प्रयोगकर्ता को विभिन्न कमाण्ड्स उपलब्ध कराता है। ई-मेल सिस्टम, प्रयोगकर्ता को एक ही मैसेज को किसी मेलिंग लिस्ट (mailing list) में स्थित समस्त ई-मेल एड्रेसेज पर एक सात भेजने की सुविधा भी देता है।जब किसी मेलिंग लिस्ट को एक मैसेज भेजा जाता है, तो उस लिस्ट के सभी ई-मेल एड्रेस पर उस मैसेज की एक समान कॉपी वितरित deliver की जाती है।

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