CCC Email Protocols Study Material in Hindi

CCC Email Protocols Study Material in Hindi

CCC Email Protocols Study Material in Hindi : CCC Exam Question Paper 2018 2019 के लिए इस पोस्ट में आप आज सिखने जा रहे हिया Email Protocol कैसे करते है | NIELIT (DOEACC) CCC Study Material E Mail की यह हमारी 4 Post है जिसे आपको अच्छे से पढ़ना होगा | CCC Study Material in Hindi की यह पोस्ट CCC Computer Exam Question Answer paper के लिए बहुत ही उपयोगी है | CCC Study Material in English की पोस्ट हम पहले ही बना चुके है | अब आने वाली हमारी CCC Question Answer and CCC Sample Solved Question Paper की पोस्ट होंगी |

CCC Email Protocols Study Material in Hindi

CCC Email Protocols Study Material in Hindi

8.15  ई-मेल प्रोटॉकॉल्स E-mail Protocols (CCC Study Material)

जब सबसे पहले ई-मेल बनायी गयी तो वह साधिण फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल से निर्मित थी। तब ई-मेल मैसेज की प्रथम लाइन प्राप्तकर्ता का एड्रेस रखती थी। समय के साथ-साथ निम्नलिखित कारणों से कहीं अधिक समुन्नत ई-मेल सिस्टम को डिजाइन करने की आवश्यकता महसूस हूई

  • लोगों के एक समूह को मैसेज भेजना असुविधाजनक था।
  • मैसेजेज का कोई इंटरनल स्ट्रक्चर (internal structure) नहीं हुआ करता थाः अतः इन्हे प्रोसेसे करना कठिन था। उदाहरणस्वरूप, किसी फॉरवर्ड किए गए मैसेज को किसी दूसरे मैसेज की  बॉडी में सन्निहित करने पर रिसीव किए गए मैसेज से फॉरवर्ड किए मैसेज को अलग (extract) करना कठिन था।
  • ई-मेल प्रेषक को यह जानकारी नहीं होती थी कि भेज मैसेज पहुँचा अथवा नहीं।
  • मेल ट्रासमिशन सिस्टम (mail transmission system) से यूजर इंटरफेस भली भाँति एकीक्रत (integrated) नहीं था। प्रयोगकर्ता को मैसेज लिखने के लिए पहले किसी टेक्स्ट एडिटर का प्रयोग कर एक फाइल बनानी पड़ती थी और उसके बाद मैसेज भेजने के ले टेक्स्ट एडिटर से बाहर आकर फाइल ट्रांसफर प्रोग्राम का प्रयोग करना पड़ता था।

ई-मेल प्रोटोकॉल (e-mail protocol)  के अन्तर्गत निम्नलिखित प्रोटोकॉल्स आते हैं

  • सिम्पल मेल ट्रांसफर प्रोटोकॉल (Simple mail transfer protocol-SMTP)
  • पोस्ट ऑफिस प्रोटोकॉल (Post office protocol-POP)
  • मल्टीपरपज इंटरनेट मेल एक्सटेंशन (Multipurpose internet mail extension-MIME)
  • इन्ट्रक्टिव मेल एक्सेस प्रोटोकॉल (Interactive mail access protocol-IMAP)
  • सिम्पल मेल ट्रांसफर प्रोटोकॉल Simple Mail Transfer Protocol-SMTP TCP/IP प्रोटोकॉल Suit का वह प्रोटोकॉल, जो इंटरनेट पर मैसेज ट्रांसफर अर्थात् ई-मेल का समर्थन करता है, सिम्पल मेल ट्रंसफर प्रोटोकॉल (simple mail transfer protocol-SMTP) कहलाता है। SMTP ई-मेल एड्रेसेज के आधार पर किसी एक कम्प्यूटर से मैसेजेज को अन्य कम्प्यूटर पर भेजने का एक सिस्टम है। SMTP किसी एक अथवात भिन्न नेटवर्क में प्रोयगकर्ताओं को मेल (mail) का आदान-प्रदान करने की सुविधा प्रदान करता है तथा निम्नलिखित का समर्थन करता है
  • एक ही मैसज को एक से अधिक ई-मेल एड्रेसेज पर भेजना।
  • मैसेज में टेक्स्ट, साउण्ड, ग्राफिक्स और वीडियो को सन्निहित कर भेजना।
  • इंटरनेट के बाह्रा नेटवर्क्स के प्रयोगकर्ताओं को मैसेजेज को भेजना।

चित्र  8.8 में SMTP की मूलभूत अवधारणा (basic concept) को दर्शाया गया है। सिम्पल मेल ट्रांसफर प्रोटोकॉल क्लाइंट और सर्वर दोनों को दो कम्पोनोन्ट्स में विभाजित किया जाता है

चित्र  8.8 SMTP

CCC Study Material

CCC Study Material

  1. यूजर एजेन्ट (User agent-UA) और
  2. मैसेज ट्रांसफर एजेन्ट (Message transfer agent-MTA)।

यूजर एजेन्ट मैसेज तैयार करता है, एनवेलप (envelope) क्रिएट करता है, और मैसेज को एनवेलेप में रखता है। यूजर एजेन्ट, प्रयोगकर्ताओं को ई-मेल  भेजने और पढ़ने की सुविधा उपलब्ध कराता है। वस्तुतः यूजर एजेन्ट, जिसे मेल-रीडर (mail-reader)   भी कहा जाता है, मैसेज को कम्पोज (Compose) और रिसीव (receive) करने तथा रिप्लाई (reply) देने के लिए विभिन्न कमाण्ड्स को प्रयोगकर्ता से स्वीकार (accept)  करता है। ये सिस्टम प्रोग्राम्स होते हैं जो सिस्टम (कम्प्यूटर) में बैकग्राउण्ड (background) में रन होते हैं और नेटवर्क में मेल को ट्रंसफर करते हैं। Send mail  यूनिक्स सिस्टम का एक मैसेज ट्रांसफर एजेन्ट प्रोग्राम है।

ई-मेल सिस्टम में सेन्डर साइट (sender site) पर केवल एक ही MTA और रिसीवर साइट (receiver site) अनेक MTAs के क्लाइंट अथवा सर्वर के रूप में मेल  (mail) को रिले (relay) अर्थात् प्रसारित कर रसकते है। रिलेयिंग सिस्टम   (relaying system) उन साइट्स (sites) को भी ई-मेल भेजने की सुविधा उपलब्ध कराता है, जो TCP/IP प्रोटोकॉल का प्रयोग नहीं करते हैं। इस कार्य के ले ई-मेल गेटव (e-mail gateway) का प्रयोग किया जाता है। ई-मेल गेटवे, एक रिले मैसेज ट्रांसफर एजेन्ट (Relay  message transfer agent-Relay MTA)  होते है, जो SMTP के अतिरिक्त किसी अन्य प्रोटोकॉल द्वारा तैयार किए गए मैसेज को

चित्र  8.9  मेल गेटवे कॉन्सेप्ट

CCC Study Material in Hindi

CCC Study Material in Hindi

SMTP फॉर्मेट में परिवर्तित करके गन्तव्य (destination) अर्थात् प्राप्तकर्ता (receiver) को प्रेषित कर देता है। चित् 8.9 में मेल गेटवे (mail Gateway) के कॉन्सेप्ट को दर्शाया गया है

ई-मेल को डिलीवर (deliver)  करने के लिए ई-मेल हैंडलिंग सिस्टम (e-mail handling system) एक अदितीय एड्रेस सिस्टम का प्रयोग करता है। SMTP द्वारा प्रयोग किया जाने वाला ऐड्रेसिंग सिस्टम (addressing System) दो भागों से निर्मित होता है

  1. एक लोकल पार्ट (Local part) और
  2. एक डोमेन नेम (Domain name), जो एक-दूसरे से at के चिह्र a से प्रथक होते हैं।

किसी भी ई-मेल का लोकल पार्ट (local part) एक विशिष्ट फाइल का नाम होता है, जिसे यूजर मेलबॉक्स (user mailbox) कहते हैं। यूजर मेलबॉक्स में किसी यूजर के लिए रिसीव किए गए मेल (received mail), यूजर एजेन्ट (user agent) द्वारा रिट्रीव (retrieve) करने के लिए स्टोर होते हैं।

ई-मेल एड्रेस का दूसरा भाग होता है-डोमेन नेम (domain name)। ज्यादातर संस्थाएँ ई-मेल को भेजने और रिसीव  (receive) करने के ले एक या एक से अधिक (host) का चयन करती है, जिन्हे मेल एक्सचेंजर (mail exchanger) कहते हैं। प्रत्येक मेल एक्सचेंजर (mail exchanger) को एक डोमेन नेम (domain name) एसाइन किया जाता है, जिसे DNS  डेटाबेट से लिया जाता है।

वास्तव में मल का ट्रांसफर,मेल ट्रांसफर एजेन्ट्स (MTAs) के माध्यम से सम्पादित किया जाता है। मले को भेजन के लिए एक सिस्टम/कम्प्यूटर के पास एक क्लाइंट MTA (a client MTA) होना चाहिए और मेल को रिसीव (Receive) करने के लिए एक सिस्टम/कम्प्यूटर के पास एक सर्वर MTA (a client MTA) होना चाहिए। SMTP किसी विशिष्ट MTAs  को परिभाषित नहीं करता है। SMTP परभाषित करता है कि कमाण्डस और उनके प्रत्युतरों   (responses) को कैसे भेजना है।

SMTP एक साधारण ASCII प्रोटोकॉल है। एक TCP कनेक्शन स्थापित करने के बाद ई-मेल भेजने वाली मशीन/कम्प्यूटर, जो क्लाइंट (client)   के रूप में कार्य करती है, ई-मेल प्राप्त करन वाली मशीन, जो सर्वर के रूप में कार्य करती है, से सर्वप्रथम सम्पर्क स्थापित करने के लिए प्रतीक्षा करती है। इसके बाद सर्वर यह सुनिश्चित करने के लिए क्लांइट को एक मैसेज भेजता है कि वह मेल को प्राप्त करने के लिए तैयार है अथवा नहीं। यदि सर्वर मेल को प्राप्त करने के लिए तैयार नहीं होता है, तो क्लाइंट स्थापित किए गए TPC कनेक्शन को मुक्त (release) कर देता है और पुनः कोशिश करता है कि मेल कौन भेज रहा है और इसे किसे भेजा जा रहा है और इसे प्राप्त करने के ले तैयार होता है, तो क्लाइंट, सर्वर को यह सूचित करता है कि मल कौन भेज रहा है और इसे किसे भेजा जा रहा है। यदि क्लाइंट द्वारा सूचित किए गए प्राप्तकर्ता का अस्तित्व गन्तव्य (destination) पर होता है, तो सर्वर, क्लाइंट को एकनॉलेज (acknowledge) किया जाता है।

  • पोस्ट ऑफिस प्रोटोकॉल Post Office Protocol-POP SMTP में गन्तव्य होस्ट (destination host)  अर्थात मेल सर्वर (mail server) सदैव ऑन-लाइन उपलब्ध होना आवश्यक है। यदि यह ऑन-लाइन उपलब्ध नहीं होता है, तो SMTP, TCLP कनेक्शन स्थापित नही किया जा सकत है क्योक डेस्कटॉप कम्प्यूटर से व्यवहारिक तौर पर एक SMTP सेशन (session) स्थापित नहीं किया जा सकता है क्योकि डेस्कटॉप कम्प्यूटर्स को कार्य समाप्त करने के बाद ऑफ (off) कर दिया जाता है।

इसलिए अधिकांश संस्थाओं में मल को एक SMTP सर्वर अर्थात् ई-मेल सर्वर, जो हमेशा ऑन-लाइन (on-line) रहता है, द्वारा प्राप्त किया जाता है। यह सर्वर संस्था के प्रत्येक होस्ट के लिए मेल को प्राप्त करता है। होस्ट अर्थात वर्कस्टेशन्स (workstations), SMTP सर्वर (ई-मेल सर्वर) से मैसेजेज अर्थात् ई-मेल को retrieve करने के लिए, एक क्लाइंट-सर्वर प्रोटोकॉल (client-server protocol ) जैसे-पोस्ट ऑफिस प्रोटोकॉल का प्रयोग करते हैं।

पोस्ट ऑफिस प्रोटोकॉल के तीसरे संस्करण को POP3 के नाम जाता है। यधपि POP3 का प्रयोग वर्कस्टेशन्स के प्रयोगकर्ताओं द्वारा मैसेजेज को SMTP सर्वर से retrieve करने अर्थात् डाउनलोड

More CCC Study Material Question Paper With Answer True False in Hindi English

NIELIT DOEACC CCC Study Material Question Answer Paper Syllabus in Hindi

Doeacc CCC Introduction To Computer Study Material in Hindi

Follow On Facebook Page

Follow on Google Plus

Follow On Twitter

Posted in All, CCC, CCC Study Material, CCC Study Material in Hindi Tagged with: , , , , , , , , , , , ,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*